Memorandum submitted to the Union Minister of State: युवा आदिवासी विकास संगठन ने केंद्रीय राज्य मंत्री को सौंपा ज्ञापन

बैतूल। अनुसूचित जाति, जनजाति और दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए म.प्र. राज्य सरकार के उच्च शिक्षा आयुक्त कार्यालय द्वारा पीएचडी छात्रवृत्ति योजना के तहत आवेदन पत्र आमंत्रित किए गए हैं। इस योजना में म.प्र. के विभिन्न विश्वविद्यालयों में अध्ययनरत अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग एवं दिव्यांग छात्रों को शोधकार्य हेतु छात्रवृत्ति दी जाती है। इस संदर्भ में युवा आदिवासी विकास संगठन, जिला बैतूल ने अनुसूचित जनजाति के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति की सीटों एवं राशि में वृद्धि की मांग करते हुए केंद्रीय राज्य मंत्री दुर्गादास उइके को ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन में संगठन ने बताया कि वर्तमान में अनुसूचित जाति के लिए हर वर्ष कुल 100 सीट आवंटित की जाती हैं, जबकि अनुसूचित जनजाति के लिए मात्र 56 सीटें ही उपलब्ध हैं। मप्र में अनुसूचित जनजाति की आबादी अनुसूचित जाति से अधिक होने के बावजूद अनुसूचित जनजाति छात्रों के साथ इस योजना में असमानता बरती जा रही है। ज्ञापन में विज्ञान, कला, वाणिज्य तथा अन्य संकायों में अनुसूचित जनजाति छात्रों के लिए सीट संख्या 56 से बढ़ाकर 120 करने की मांग की गई है।
इसके अलावा, वर्तमान में दिए जा रहे 16 हजार रुपये प्रति माह की छात्रवृत्ति को बढ़ाकर 25 हजार रुपये प्रति माह करने की भी मांग की गई है, जिससे गरीब छात्रों को महंगाई के इस दौर में आर्थिक समस्याओं का सामना न करना पड़े और वे बिना किसी मानसिक व आर्थिक दबाव के अपना शोधकार्य कर सकें।
ज्ञापन देने वालों में संगठन के प्रमुख सदस्य राजेश कुमार धुर्वे, राजकुमार परते, सुमित वाघमारे, प्रदीप उइके और छोटू सिंह उइके शामिल थे। प्रतिलिपि मुख्यमंत्री, आयुक्त उच्च शिक्षा विभाग और अनुसूचित जनजाति कार्य मंत्री को भी भेजी गई है, ताकि इस मुद्दे को शीघ्र सुलझाया जा सके और अनुसूचित जनजाति छात्रों को शिक्षा में समान अवसर प्राप्त हो।

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