Betul news: ग्राम पंचायत चोपना में फर्जी बिलों से लाखों की हेराफेरी,सरपंच, उपसरपंच और सचिव पर लगे गंभीर आरोप

आवेदक अजय कर्मकार ने की उच्च अधिकारियों से कार्रवाई की मांग


बैतूल। ग्राम पंचायत चोपना के सरपंच और सचिव पर सरकारी राशि के दुरुपयोग और गबन का गंभीर आरोप लगाते हुए ग्राम चोपना के निवासी अजय कर्मकार ने कलेक्टर से शिकायत की है। आवेदक ने बताया कि ग्राम पंचायत में किसान और जनकल्याण के लिए आई राशि को फर्जी बिल और मस्टर रोल के जरिए हड़प लिया जा रहा है। आवेदक ने उच्च अधिकारियों से इस मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अजय कर्मकार का कहना है कि ग्राम पंचायत चोपना में सामुदायिक स्वच्छता परिसर का निर्माण और अन्य विकास कार्यों में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं। सामुदायिक स्वच्छता परिसर का निर्माण बिना बीम के कर दिया गया, जिससे उसकी गुणवत्ता पर सवाल खड़े हो गए हैं। इसके अलावा, हाट बाजार नीलामी की राशि और 2020-21 और 2021-22 की राशियों का भी गबन किया गया है। स्टॉप डेम और सीसी रोड के निर्माण में भी घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है, जिससे नई बनी सड़कों और डेम की स्थिति खराब हो गई है।
56 हजार 500 का भुगतान रोका
अजय कर्मकार ने आरोप लगाया है कि उनके द्वारा पंचायत में नल सुधार कार्य करवाने के बावजूद उनकी मजदूरी की राशि 56 हजार 500 का भुगतान नहीं किया गया है। कई बार शिकायत करने के बावजूद भी अधिकारियों द्वारा कोई कार्यवाही नहीं की गई है। अजय कर्मकार ने सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के तहत जानकारी मांगने का भी प्रयास किया, लेकिन पंचायत के सचिव ने उन्हें जानकारी देने से मना कर दिया और उनके खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज करा दीं। इस मामले में अजय ने कलेक्टर से जनसुनवाई के जरिए भी शिकायत दर्ज कराई थी, जिसका क्रमांक 3100 है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।
शिकायतकर्ताओं को धमकाने का आरोप
चोपना ग्राम पंचायत के सरपंच पर आरोप है कि उन्होंने शिकायत करने वालों को जाति का फायदा उठाते हुए धमकाया और झूठे मामलों में फंसाने की धमकी दी। अजय कर्मकार ने आरोप लगाया अनियमितताओं की शिकायत करने पर शिकायतकर्ताओं को मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जा रहा है। सरपंच द्वारा धमकी दी जाती है कि अगर कोई उनके खिलाफ आवाज उठाएगा, तो उसे हरिजन आदिवासी एक्ट के तहत जेल भिजवाया जाएगा, जिसमें जमानत भी नहीं हो सकेगी।
अजय कर्मकार का कहना है कि सरपंच और सचिव के इस तरह के व्यवहार से लोग उनके खिलाफ शिकायत करने से डरते हैं। इससे पंचायत में मनमानी और सरकारी राशि के दुरुपयोग के आरोप भी सामने आ रहे हैं। उन्होंने अधीक्षक से सरपंच, उप सरपंच और सचिव के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है ताकि अनियमितताओं पर रोक लगाई जा सके।

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