जिला अस्पताल के आयुष विंग में फिर शुरू हुई पंचकर्म चिकित्सा
संधिवात, गठिया, मधुमेह, दमा, त्वचा रोग, तनाव और अनिद्रा समेत कई बीमारियों के मरीजों को मिलेगा लाभ

बैतूल। जिला एलोपैथी चिकित्सालय परिसर स्थित आयुष विंग में पंचकर्म चिकित्सा सेवा पुनः शुरू हो गई है। आयुष विंग प्रभारी एवं आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. प्रियंका ऊईके ने बताया कि पंचकर्म आयुर्वेद की शोधन चिकित्सा है, जिसके माध्यम से शरीर के विषैले तत्व (टॉक्सिन्स) बाहर निकालने के बाद औषधियों से उपचार किया जाता है। इसके तहत स्नेहन, स्वेदन, दीपन और पाचन जैसी पूर्व प्रक्रियाओं के बाद वमन, विरेचन, बस्ती, नस्य एवं रक्तमोक्षण जैसी प्रमुख क्रियाएं की जाती हैं।
जिला आयुष अधिकारी डॉ. योगेश चौकिकर ने बताया कि यह चिकित्सा संधिवात, आमवात, गठिया, मोटापा, मधुमेह, दमा, एक्जिमा, सोरायसिस सहित विभिन्न त्वचा रोगों, पक्षाघात, सिरदर्द, तनाव और अनिद्रा जैसी बीमारियों में प्रभावी मानी जाती है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में यह सुविधा जिला अस्पताल के आयुष विंग तथा जिला आयुर्वेद चिकित्सालय बैतूल में उपलब्ध है।




