सिर्फ मनोरंजन नहीं, कर्तव्यनिष्ठा और सत्य का संदेश दे गया नाटक सत्यवादी हरिश्चंद्र।
जीवंत मंचन ने बांधा समां, राजा हरिश्चंद्र के त्याग से भावुक हुए दर्शक सत्य, त्याग और धर्म की गाथा ने जीता ग्रामीणों का दिल । अद्भुत अभिनय और प्रभावशाली संवादों से जीवंत हुआ नाटक सत्यवादी हरिश्चंद्र।

बैतूल। कल्याणपुर गांव में स्थानीय युवाओं द्वारा मंचित नाटक सत्यवादी हरिश्चंद्र ने दर्शकों को केवल मनोरंजन ही नहीं, सत्य, कर्तव्यनिष्ठा और त्याग का संदेश भी दिया। राजा हरिश्चंद्र के जीवन पर आधारित इस प्रस्तुति ने उनकी सत्यनिष्ठा, वचनबद्धता और बलिदान की गाथा को प्रभावशाली ढंग से जीवंत कर दिया। कलाकारों की अद्भुत अदाकारी और जीवंत मंचन ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
ग्रामीण क्षेत्रों में वर्षों से नाट्य मंचन मनोरंजन और सामाजिक जागरूकता का प्रमुख माध्यम रहा है। आधुनिक संसाधनों के अभाव वाले दौर में नाटक ही लोगों के मनोरंजन का प्रमुख साधन हुआ करते थे। इसी परंपरा को जीवित रखने के उद्देश्य से गांव में ऐसे नाटकों का मंचन किया जाता है, जिनमें सांस्कृतिक धरोहर, वीर राजाओं-रानियों और सनातन मूल्यों को प्रस्तुत किया जाता है। विशेष बात यह है कि सभी भूमिकाएं पुरुष कलाकार निभाते हैं तथा दोहा, सोरठा, छंद और संवादों के वाचन पर विशेष ध्यान दिया जाता है। पांच से सात दिन तक चलने वाले ये नाटक रामलीला की तर्ज पर आयोजित होते हैं और दिनभर की थकान के बाद ग्रामीणों को स्वस्थ मनोरंजन प्रदान करते हैं।
– सत्य की परीक्षा की कथा ने किया प्रभावित
नाटक में दर्शाया गया कि सत्यवादी राजा हरिश्चंद्र सत्य और वचन के इतने पक्के थे कि उन्होंने अपना संपूर्ण राजपाट दान कर दिया। दक्षिणा चुकाने के लिए उन्होंने स्वयं, अपनी पत्नी तारावती और पुत्र रोहित को बेच दिया। श्मशान घाट पर कर वसूलने का कार्य करते हुए भी उन्होंने अपने कर्तव्य से समझौता नहीं किया। पुत्र रोहित की सर्पदंश से मृत्यु होने पर जब तारावती उसका अंतिम संस्कार कराने पहुंचीं तो उनसे भी कर लिया गया। अंत में देवराज इंद्र प्रकट होकर बताते हैं कि यह सब उनके सत्य की परीक्षा थी। परीक्षा में सफल होने पर रोहित पुनर्जीवित हो जाता है और राजा हरिश्चंद्र को उनका राजपाट वापस मिल जाता है। कथा ने सत्य, धर्म और कर्तव्यपालन की महत्ता को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
– कलाकारों ने निभाई प्रभावशाली भूमिकाएं
नाटक के लेखक नत्थाराम गौड़ रहे। राजा हरिश्चंद्र की भूमिका प्रशांत पार्थ, रानी तारावती की भूमिका मनीष कपले, रोहित का पात्र सागर, विश्वामित्र की भूमिका प्रमोद कपले, इंद्र का पात्र अंकेश तिवारी, माली की भूमिका ओमप्रकाश तिवारी, मालिन का पात्र रामनाथ यादव, पंडित की भूमिका रामपाल यादव, कलिया का पात्र कमलेश यादव तथा तवायफ की भूमिका रामभरोश गोहे ने निभाई। सभी कलाकारों के प्रभावशाली अभिनय को दर्शकों ने सराहा।




