MP News: पढ़ाई का ऐसा जुनून कि उफनती नदी पार कर स्कूल जा रहे बच्चे

MP News: बैतूल। मध्यप्रदेश में विकास का दावा करने वाली सरकार और नेताओं की नाकामी बैतूल जिले में हर वर्षा काल में तब सामने आती है, जब शिक्षा की रोशनी पाने के लिए बच्चे सिर पर स्कूल बैग रखकर उफनती नदी को पार कर स्कूल जाते हैं। यह तस्वीर एक गांव की नही है बल्कि जिले में आधा दर्जन से भी अधिक नदियों पर पुल ना होने से हमेशा सामने आती रहती है। इसके बाद भी बैतूल जिले के सांसद, क्षेत्र के विधायक सहित प्रशासनिक अधिकारियों को रत्ती भर भी शर्म नही आ रही है।
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मध्यप्रदेश के बैतूल जिले में घोड़ाडोंगरी विधानसभा का गांव टांगना माल आज भी मोरंड नदी के कारण संपर्क विहीन हो जाता है। टांगना माल के लगभग आधा सैकड़ा बच्चे बीजादेही हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ते हैं। यहां स्कूल जाने के लिए बच्चो को रास्ते में पड़ने वाली मोरन नदी पार करना होता है। बारिश के दिनो मे इस नदी में बाढ़ आ जाने या जलस्तर बढ़ जाने पर दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बरसात में स्कूली बच्चे छाती-छाती तक पानी में सिर पर बस्ता रखे हाथ में जूते चप्पल पकड़े नदी पार करके स्कूल जाते हैं।

परिजनों को पहुंचना पड़ता है नदी किनारे

बारिश होने पर बच्चों के परिजनों को उन्हें लाने के लिए नदी के किनारे पर पहुंचना होता है। ऐसे ही स्कूल पहुंचाने के लिए भी उन्हें जतन करने पड़ते है। स्कूली बच्चे ही नहीं ग्रामीण भी अस्पताल जाना हो या फिर बीजादेही बाजार उन्हें जान जोखिम में डालकर उफनती नदी पार करके बीजादेही पहुंचना होता हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि यहां पुलिया के लिए लगभग 20 सालों से ग्रामीण मांग कर रहे हैं। पूर्व विधायक से लेकर वर्तमान विधायक तक गुहार लगा चुके हैं, पर पुलिया नहीं बनी है। अभी वर्तमान सरपंच राधा पप्पू आहके ने भी वर्तमान विधायक एवं सांसद के पास बीजादेही टांगना के बीच मोरन नदी पर पुल बनाने के लिए अनुरोध किया है, पर कोई सुनवाई नहीं हुई है।
20 किमी. का लगाना पड़ता है फेरा
ग्रामीण पप्पू कवड़े ने बताया की बीजादेही जाने के लिए ढाई किमी लंबे इस रास्ते पर यह नदी पड़ती है। अगर इसमें तेज बाढ़ आ जाए तो फिर उन्हें 20 किमी का फेरा लगाकर बीजादेही पहुंचना होता है। कुछ दिन पहले ऊंचा गोहान पंचायत में पुलिया के अभाव में स्कूली बच्चे जान जोखिम में डालकर उफनती नदी के स्टाप डैम पर पटिया रखकर नदी पार करते नजर आए थे। समाजसेवी दिनेश यादव का कहना है कि 1998 में कांग्रेस सरकार के दौरान  तत्कालिन मुख्यमंत्री ने इस नदी पर पुल बनाने  की घोषणा की थी  और इसके बाद भाजपा सरकार के समय घोषणा हुई लेकिन आज तक नदी पर पुल नहीं बन पाया है।
मई 2016 में फंसा था मुख्यमंत्री का रथ 
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान मई 2016 में घोड़ाडोंगरी विधानसभा के उपचुनाव में प्रचार करने आए थे। रोड शो करने के लिए उनका वातानुकूलित चुनावी रथ आया था और जब वे बिना पुल की सूखी मोरंड नदी पर उनका रथ निकल रहा था तो फंस गया था। रथ को निकालने के लिए लगभग 20 मिनट तक भाजपा कार्यकर्ताओं ने मशक्त की और धक्का मारकर रथ निकाला था। ग्रामीणों का दांवा है कि उसी समय यहां पुल बनाने की घोषणा की गई थी, लेकिन अभी तक पुल नहीं बना।

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