public private partnership: जिला चिकित्सालय को पीपीपी मोड पर संचालित करने की योजना में कई तथ्यात्मक खामियां

जिला चिकित्सालय को मूल स्वरूप में रखने की मांग,मध्य प्रदेश चिकित्सा अधिकारी संघ ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

बैतूल। मध्य प्रदेश चिकित्सा अधिकारी संघ ने जिला चिकित्सालय के मूल स्वरूप को यथावत् रखने और पीपीपी मोड पर संचालित होने वाले मेडिकल कॉलेज को समानांतर रूप से बनाए रखने के लिए कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में कहा गया है कि जिला चिकित्सालय को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड पर संचालित करने की योजना में कई तथ्यात्मक और व्यावहारिक खामियां हैं, जिन्हें बिना विचार किए जल्दबाजी में अपनाना हानिकारक हो सकता है।

— पीपीपी मोड पर चिकित्सा सेवाओं में असंतुलन का खतरा– 

ज्ञापन के अनुसार, पीपीपी मोड पर जिला चिकित्सालय में 75 प्रतिशत बिस्तर फ्री सेवा और 25 प्रतिशत बिस्तर पेमेंट अथवा आयुष्मान योजना के अंतर्गत लिए जाएंगे। चिकित्सालय के नर्सिंग स्टाफ और डॉक्टरों की सेवाएं प्राइवेट मैनेजमेंट के अधीन कर दी जाएंगी या उन्हें अन्यत्र शिफ्ट कर दिया जाएगा। इससे स्वास्थ्य सेवाओं में असंतुलन पैदा हो सकता है, जिससे जनता को परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

— स्वास्थ्य सेवाओं की मौजूदा व्यवस्था हो जाएगी भंग– 

भारत सरकार द्वारा स्वास्थ्य सेवाओं के लिए एक बेहतर ढांचा बनाया गया है, जिसमें प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, सिविल अस्पताल, जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेज शामिल हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि पीपीपी मोड के चलते यह व्यवस्था भंग हो जाएगी, क्योंकि जिला चिकित्सालय का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा और जिला में केवल प्राइवेट मेडिकल कॉलेज होगा। इससे द्वितीय और तृतीय स्तर की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से प्राइवेट मैनेजमेंट के अधीन हो जाएंगी, जिससे प्राइवेट संस्थानों की मनमानी बढ़ जाएगी।

— फोरेंसिक कार्यों में भी आएगी दिक्कतें– 

ज्ञापन में बताया गया है कि जिला में एमएलसी, पीएम और आयु निर्धारण जैसे कार्य भी प्राइवेट संस्थानों द्वारा किए जाएंगे, जो कि व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। अन्य बड़े जिलों जैसे भोपाल, इंदौर, ग्वालियर, जबलपुर आदि में सरकारी मेडिकल कॉलेज ये कार्य संभालते हैं।

— फ्री और पेमेंट बेड की पारदर्शिता पर उठेंगे सवाल– 

वर्तमान में जिला चिकित्सालय में 500 बेड उपलब्ध हैं। पीपीपी मोड के बाद भी इसकी संख्या समान मानी जाएगी, लेकिन 75 प्रतिशत फ्री और 25 प्रतिशत पेमेंट के अनुसार 500 में से 125 बेड पेमेंट के होंगे। इस पर आयुष्मान वाले मरीजों का या पैसों से इलाज होगा। इससे केवल 375 बेड आम जनता के लिए फ्री रहेंगे और इसमें कौन से मरीज का इलाज फ्री होगा और कौन से मरीज पेमेंट देंगे, इसकी पारदर्शिता का नियंत्रण शासन के अधीन नहीं रहेगा।

— यह है संघ की मांग– 

मध्य प्रदेश चिकित्सा अधिकारी संघ ने ज्ञापन में मांग की है कि जिला चिकित्सालय में कार्यरत सभी डॉक्टर, नर्सिंग ऑफिसर, तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को यथावत् शासन के अधीन रखा जाए और जिला चिकित्सालय के मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए मेडिकल कॉलेज को समानांतर रूप से संचालित किया जाए। ज्ञापन सौंपने वालों में मध्य प्रदेश चिकित्सा अधिकारी संघ के अध्यक्ष डॉ. पद्माकर, डॉ. जगदीश धोटे, डॉ. रानू वर्मा, डॉ. आर. बारंगे, डॉ. परिहार और डॉ. प्रांजल शामिल थे।

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