बैतूल को ‘नदियों का ननिहाल’ बनाने की पहल, 1399 गांवों से गुजरने वाली नदियों के नाम शासकीय रिकॉर्ड में दर्ज करने की मांग

204 साल बाद भी राजस्व नक्शों में नदियों के नाम नहीं, जनसुनवाई में उठी ऐतिहासिक मांग। ताप्ती, वर्धा, पूर्णा की धरती बैतूल में नदियों की प्रमाणिक सूची बनाने का प्रस्ताव। पुस्तक ‘नदियों का ननिहाल’ के लिए प्रमाणिक आंकड़े मांगे, पद्मश्री मोहन नागर से भी जानकारी का अनुरोध

बैतूल। जिले की राजस्व सीमाओं और नक्शों में नदियों के नाम दर्ज नहीं होने का मुद्दा जनसुनवाई में उठाया गया है। आवेदक रामकिशोर दयाराम पंवार ने जनसुनवाई में आवेदन देकर मांग की है कि बैतूल जिले की भौगोलिक सीमाओं को चिन्हित करने वाली तथा 1399 गांवों के आसपास से गुजरने या निकलने वाली नदियों के नाम शासकीय रिकॉर्ड में जोड़े जाएं।

आवेदन में उल्लेख किया गया है कि 15 मई से 1822 मई के बीच अंग्रेजों द्वारा निर्मित बैतूल जिले के गठन के 204 वर्षों बाद भी जिले की जीवन रेखा कही जाने वाली नदियों के नाम राजस्व रिकॉर्ड में संकलित रूप से दर्ज नहीं हैं। शासन-प्रशासन के पास भी ऐसी कोई प्रमाणिक सूची उपलब्ध नहीं है, जबकि जिले के दस जनपद आमला, बैतूल, मुलताई, भैंसदेही, आठनेर, चिचोली, शाहपुर, घोड़ाडोंगरी, भीमपुर और प्रभात पट्टन तथा दस नगरीय निकाय सारणी, बैतूल, आमला, मुलताई, आठनेर, घोड़ाडोंगरी, शाहपुर, बैतूल बाजार, चिचोली और भैंसदेही के आसपास से अनेक नदियां बहती हैं।

रामकिशोर दयाराम पंवार ने रामघाटी में पूर्णा नदी के पुनर्जीवन पर 45 करोड़ रुपए खर्च होने के बावजूद अपेक्षित परिणाम नहीं मिलने का उल्लेख करते हुए कहा कि यदि नदियों का दस्तावेजीकरण नहीं होगा तो संरक्षण की प्रक्रिया भी अधूरी रहेगी। उन्होंने बताया कि राज्य और केंद्र सरकार की प्रतियोगी परीक्षाओं में जिले की विशेषताओं से जुड़े प्रश्न पूछे जाते हैं, लेकिन प्रमाणिक जानकारी के अभाव में छात्र स्पष्ट उत्तर नहीं दे पाते।

– ताप्ती विपरीत प्रवाह की विशेषता वाली नदी

आवेदन में बैतूल की विशिष्ट जल भौगोलिक स्थिति का भी उल्लेख किया गया है। पूरी दुनिया में ताप्ती और वर्धा जैसी नदियां एक ही क्षेत्र का जल संग्रहित कर अलग-अलग दिशाओं के सागरों में पहुंचाती हैं। बैतूल जिले से निकलने वाली ताप्ती नदी को विपरीत प्रवाह की विशेषता वाली नदी बताया गया है, जो मैदान से पहाड़ की ओर बहती है। तावड़ी वन परिक्षेत्र की झापल पहाड़ी से भाजी, काजल, खंडू, गंजाल और मोरंड नामक पांच नदियों का एक साथ उद्गम होना भी जिले की विशेष पहचान बताया गया है। ताप्ती, वर्धा और पूर्णा की अनेक सहायक नदियों के नामों की भी कोई संकलित प्रमाणिक सूची उपलब्ध नहीं होने की बात आवेदन में कही गई है।

आवेदक ने मांग की है कि जिला प्रशासन ग्राम पंचायतों और राजस्व विभाग के पटवारियों को निर्देशित कर जनगणना की तर्ज पर नदियों के नाम, उद्गम स्थल और प्रवाह क्षेत्र को शासकीय दस्तावेजों में दर्ज कराए। उनका दावा है कि यदि प्रमाणिक आंकड़े संकलित हुए तो मध्यप्रदेश में सर्वाधिक नदियों के उद्गम और प्रवाह वाला जिला बैतूल सिद्ध हो सकता है और इसे ‘नदियों का ननिहाल’ के रूप में पहचान मिल सकती है।

– शासकीय जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध

इसी विषय पर रामकिशोर दयाराम पंवार ने पद्मश्री मोहन नागर, राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त उपाध्यक्ष मध्यप्रदेश जन अभियान परिषद को भी अलग से निवेदन पत्र दिया है। उन्होंने बैतूल जिले की जल संरचनाओं, 1399 गांवों के आसपास से गुजरने वाली नदियों के उद्गम स्थलों और उनके जल प्रवाह क्षेत्र की उपलब्ध प्रमाणिक एवं शासकीय जानकारी उपलब्ध कराने का अनुरोध किया है।

निवेदन पत्र में उल्लेख है कि भारत सरकार द्वारा जल संरचनाओं पर उत्कृष्ट कार्य के लिए पद्मश्री मोहन नागर को सर्वोच्च सम्मान प्रदान किया गया है तथा उन्हें केंद्र सरकार द्वारा जल प्रहरी के रूप में भी सम्मानित किया जा चुका है। रामकिशोर दयाराम पंवार अपनी पुस्तक ‘नदियों का ननिहाल’ के प्रकाशन की तैयारी कर रहे हैं और उसमें प्रमाणिक आंकड़े शामिल करना चाहते हैं। उनका कहना है कि यदि संकलित सूची उपलब्ध हो जाए तो बैतूल प्रदेश का वह जिला बन सकता है जहां से सर्वाधिक नदियों का उद्गम और प्रवाह होता है, जिससे जिले की राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान बन सकती है।

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