Betul News : किसानों की मांग अनसुनी, अफसर अपनी मर्जी से नहर में पानी छोड़ने की तैयारी में।

किसानों में जल संसाधन विभाग के अफसरों की मनमानी से बढ़ रहा आक्रोश।

 

Betul News : बैतूल। जिले के प्रमुख सापना जलाशय से नहरों में पानी छोड़ने के निर्णय को लेकर किसानों और जल संसाधन विभाग के बीच असहमति गहराती जा रही है। किसानों का आरोप है कि विभाग बिना बैठक बुलाए और सहमति लिए मनमाने ढंग से पानी छोड़ने की तैयारी कर रहा है, जिससे कमांड क्षेत्र में असंतोष बढ़ रहा है।

बैठक के बिना निर्णय पर आपत्ति

किसानों का कहना है कि शासन के निर्देशानुसार नहरों में पानी छोड़ने से पहले कमांड क्षेत्र के किसानों की बैठक आयोजित की जानी चाहिए। आरोप है कि इस प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा। किसानों ने पहले 20 फरवरी से पानी छोड़ने की मांग रखी थी, जिस पर ध्यान नहीं दिया गया। बाद में 26 फरवरी को ज्ञापन सौंपा गया, लेकिन विभाग ने 24 फरवरी से ही पानी छोड़ने की तैयारी शुरू कर दी, जिससे किसान नाराज हैं।

 टेल क्षेत्र में पानी न पहुंचने की समस्या

पिछली सिंचाई के दौरान टेल क्षेत्र भोगीतेढ़ा और बडोरा में करीब तीन सप्ताह तक पानी नहीं पहुंच सका था। किसानों के विरोध के बाद अधिक मात्रा में पानी छोड़े जाने से नहरों पर दबाव बढ़ गया और बैतूलबाजार क्षेत्र में नहर क्षतिग्रस्त होने की स्थिति बन गई थी। कई दिनों तक पानी बहने से बर्बादी भी हुई।

3650 हेक्टेयर में होती है सिंचाई

बैतूल के समीप सापना नदी पर बने इस जलाशय की संग्रहण क्षमता 14.320 एमसीएम है। इससे लगभग 3650 हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई होती है। किसानों का आरोप है कि इस वर्ष पलेवा और पहली सिंचाई दोनों में देरी हुई, और अब अंतिम सिंचाई को लेकर भी स्पष्टता नहीं है।

होली के मद्देनज़र किसानों की मांग

आरूल, सिंगनवाड़ी और आसपास के गांवों के किसानों का कहना है कि होली और फागुन मेलों के कारण खेतों में मजदूरों की उपलब्धता कम रहेगी। ऐसे में अभी पानी छोड़े जाने से बर्बादी की आशंका है। किसानों ने मांग की है कि त्योहारों के बाद नहरों में पानी छोड़ा जाए, ताकि सिंचाई व्यवस्थित तरीके से हो सके।

 विभाग का पक्ष

जल संसाधन विभाग के एसडीओ भूपेंद्र सूर्यवंशी का कहना है कि सर्वे के आधार पर वर्तमान में गेहूं की फसल को पानी की आवश्यकता है। विभाग का दावा है कि इस बार टेल क्षेत्र तक प्राथमिकता से पानी पहुंचाया जाएगा और बर्बादी पर नियंत्रण के प्रयास किए जाएंगे।

प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

किसानों ने जनप्रतिनिधियों और जिला प्रशासन से हस्तक्षेप कर किसानों की बैठक बुलाने और सहमति के बाद ही पानी छोड़ने का निर्णय लेने की मांग की है। उनका कहना है कि पारदर्शिता और समन्वय से ही सिंचाई व्यवस्था सुचारु रह सकती है।

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