*हुंकार: ग्रीन टाइगर्स*
2 जून स्थापना दिवस विशेष प्रसंग।।

भोर की पहली किरण के संग, जो नींद को तज देते हैं,
बैतूल की पावन माटी में, जो नव-जीवन भर देते हैं।
नहीं थके जो सात वर्षों से, न डिगे कभी अपने प्रण से,
वो ‘ग्रीन टाइगर्स’ हैं हमारे, जो लड़ते हैं प्रदूषण के रण से।
लख-लख नन्हे पौधों को, तुमने अंबर तक पहुँचाया है,
सूखी पड़ी उस धरती पर, शीतल सा आँचल फैलाया है।
नदियों की कल-कल थम गई थी,तालाबों में छाई थी पीर,
तुमने बढ़कर हाथ लगाया, और बदल दी जल की तकदीर।
नित सवेरे एक घंटा, तुम कुदरत के नाम चढ़ाते हो,
सिर्फ पौधा नहीं रोपते तुम, एक पूरी नस्ल बचाते हो।
देख-रेख और संरक्षण ही, असली पहचान तुम्हारी है,
सच्चे सिपाही हो धरती के, यह प्रकृति जान तुम्हारी है।
थकना मत तुम टाइगर्स कभी, अभी लंबा सफर निभाना है,
हर बंजर को उपवन करना, हर घर को स्वर्ग बनाना है।
तुमसे ही उम्मीदें जग की, तुमसे ही हरियाली है,
तुम्हारे पसीने की हर बूँद से, इस धरती में खुशहाली है।
– भूपेंद्र मालवी
(ग्रीन टाइगर्स बैतूल)




