भीमपुर में खानदानी जमीन पर बढ़ा विवाद ।

सीमांकन कार्रवाई को लेकर कलेक्टर से शिकायत । तहसीलदार के आदेश से शुरू हुआ नया विवाद।

बैतूल। भीमपुर में आदिवासी परिवारों की खानदानी कृषि भूमि को लेकर विवाद गहरा गया है। जमीन के बंटवारे, नक्शा और सीमांकन की कार्रवाई को लेकर मामला अब कलेक्टर कार्यालय और न्यायालय तक पहुंच गया है। आवेदक बराती पिता खण्डु, जयसिंग पिता खण्डु, कमदी पिता खण्डु, फुलन्ता पिता खण्डु और उगन्ता पिता खण्डु निवासी भीमपुर ने जनसुनवाई में कलेक्टर से शिकायत कर आरोप लगाया है कि उनकी पैतृक भूमि पर अनावेदक पक्ष जबरन कब्जा करने का प्रयास कर रहा है।

आवेदन के अनुसार मूल खसरा नंबर 166 रकबा 3.387 हेक्टेयर में से खसरा नंबर 166/2 रकबा 1.416 हेक्टेयर भूमि स्वर्गीय खण्डु को वर्ष 1972-73 में मेढ़ घुरा डालकर हुए आपसी बंटवारे में मिली थी, जिसका उल्लेख 27 अप्रैल 1973 के संशोधन में दर्ज है। खण्डु की मृत्यु के बाद वर्ष 2017 में वारसान हक के आधार पर बराती पिता खण्डु सहित अन्य आवेदकों के नामांतरण दर्ज हुए और तब से वे जमीन पर खेती कर रहे हैं।

आवेदकों ने आरोप लगाया है कि सुरजलाल पिता काशीराम परते, लता पिता सुनील सलामे, बसन्तकिशोर पिता नन्दकिशोर, किशोरीलाल पिता मिश्रीलाल, प्रशान्त पिता शरदकिशोर, रामजी पिता भादु, समलु पिता भादु, सुखराम पिता भादु, सुल्ललौ पिता अमिरलाल, गीता पति सुरेश कास्दे, सामपत्ति पति जद्द और जगनू पिता दामजी निवासी भीमपुर ने मिलीभगत से खसरा नंबर 166 में से 166/1 और 166/4 की जमीन को बिना वैधानिक परिवर्तन आवासीय प्लॉट के रूप में बेच दिया और अब शेष भूमि पर भी कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा है। आवेदकों का कहना है कि विरोध करने पर उन्हें झूठे मामलों में फंसाने और जान से मारने की धमकी दी जा रही है।

विवाद राजस्व न्यायालय तक पहुंच चुका है। तहसीलदार भीमपुर के 3 जनवरी 2025 के आदेश के खिलाफ बराती पिता खण्डु सहित चार लोगों ने अनुविभागीय अधिकारी राजस्व भैंसदेही के न्यायालय में अपील की थी, जिस पर 2 जून 2025 को सीमांकन की कार्रवाई पर अस्थायी रोक लगा दी गई थी। वहीं खसरा 166/1/1 के सीमांकन के लिए सामपती पति दद्दू द्वारा दिए गए आवेदन पर भी आवेदकों की आपत्ति के बाद राजस्व विभाग ने माना कि नक्शा तरमीम का मामला सिविल कोर्ट भैंसदेही में आरसीएसए 121/2025 के रूप में लंबित है, इसलिए सीमांकन उचित नहीं है और प्रकरण समाप्त कर दिया गया।

अब आवेदक पक्ष ने कलेक्टर से मांग की है कि न्यायालय के अंतिम निर्णय तक उनकी खानदानी भूमि पर किसी भी प्रकार की सीमांकन या कब्जे से संबंधित कार्रवाई रोकी जाए और पूर्व बंटवारे को मान्यता दी जाए।

आवेदकों ने आरोप लगाया है कि पटवारी और तहसीलदार द्वारा विरोधी पक्ष को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से बिना उनकी सहमति के प्रस्तावित नक्शा पास कर दिया गया, जिससे पूरे मामले में नया विवाद खड़ा हो गया। उनका कहना है कि प्रशासन की निष्क्रियता के कारण विरोधी पक्ष के हौसले बुलंद हैं और वे लगातार जमीन पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं। आवेदकों ने जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग भी की है।

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