complaint of unauthorized occupation: कृषि भूमि पर बने मरही माता मंदिर पर अनाधिकृत कब्जे की शिकायत
समिति के पदाधिकारियों पर धोखाधड़ी और धार्मिक उन्माद फैलाने का आरोप

समिति के पास कोई दान पत्र, सहमति पत्र या वार्षिक लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं
बैतूल। मुलताई के मासोद रोड स्थित मरही माता मंदिर पर कब्जे और दान-दक्षिणा की अवैध वसूली को लेकर बवाल मच गया है। आवेदक प्रदीप पवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि उनके पूर्वजों द्वारा बनाए गए इस मंदिर पर कुछ लोगों ने अनाधिकृत रूप से कब्जा कर लिया है। उन्होंने बताया कि बिना किसी स्वीकृति या दान पत्र के एक समिति बना ली गई है और मंदिर परिसर को अपना बताकर दान-दक्षिणा वसूली जा रही है। प्रदीप पवार ने कलेक्टर और एसपी से शिकायत की है और मंदिर पर सूचना बोर्ड लगाकर स्पष्ट किया है कि मंदिर निजी स्वामित्व में है। समिति के पदाधिकारियों पर धोखाधड़ी और धार्मिक उन्माद फैलाने का आरोप लगाते हुए प्रदीप पवार ने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। प्रदीप पवार के अनुसार, मंदिर उनके पूर्वजों द्वारा बनवाया गया था और इसके सार्वजनिक उपयोग के लिए कोई दान पत्र या घोषणा नहीं की गई थी। इसके बावजूद, कुछ लोगों ने अनाधिकृत रूप से एक समिति बनाकर मंदिर से दान दक्षिणा लेना शुरू कर दिया।

प्रदीप पवार ने बताया कि मंदिर उनके खेत रकबा नं. 760/1/40 और 760/1/39 पर स्थित है। इस भूमि के वे और उनके चार अन्य भाई मालिक हैं। प्रदीप पवार के अनुसार, मरही माता जन कल्याण समिति द्वारा मंदिर परिसर को अपना बताकर प्रशासन को गुमराह किया जा रहा है और परिसर के सामने अवैध निर्माण करवाया जा रहा है। प्रदीप पवार का कहना है कि समिति को किसी भी प्रकार का दान पत्र, स्वीकृति पत्र या कोई लिखित दस्तावेज नहीं दिया गया है। उन्होंने आरटीआई के माध्यम से जानकारी प्राप्त की जिसमें स्पष्ट हुआ कि समिति के पास कोई दान पत्र, सहमति पत्र या वार्षिक लेखा-जोखा उपलब्ध नहीं है। प्रदीप पवार ने कलेक्टर और एसपी सहित आला अधिकारियों से इस मामले की शिकायत की है। उन्होंने मंदिर पर एक सूचना बोर्ड लगाकर स्पष्ट किया है कि श्री मरही माता मंदिर निजी स्वामित्व में है और किसी प्रकार की दान-दक्षिणा या सहयोग राशि नहीं चढ़ाई जाए। उन्होंने लोगों से अनुरोध किया है कि जो भी दान देना चाहते हैं, उसे किसी गरीब, अनाथ, या असहाय व्यक्ति को देकर पुण्य लाभ प्राप्त करें।
— समिति के पदाधिकारियों पर आरोप–
प्रदीप पवार ने आरोप लगाया है कि समिति के पदाधिकारी, भिवजी पवार (अध्यक्ष), रविंद्र देशमुख (सचिव), और मनोज साबले (कोषाध्यक्ष) प्रिंट मीडिया के माध्यम से मंदिर परिसर को अपना बताकर आम जनता और प्रशासन को धोखा दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ये लोग धार्मिक उन्माद उत्पन्न करने का प्रयास कर रहे हैं और आस्था से खिलवाड़ कर रहे हैं।
— प्रशासन से कार्रवाई की मांग–
प्रदीप पवार ने प्रशासन से निवेदन किया है कि समिति के सभी दस्तावेज, दान पत्र, सहमति पत्र, और वार्षिक लेखा-जोखा की जांच की जाए और मंदिर परिसर के आसपास के अवैध कब्जे को हटाया जाए। उन्होंने दोषियों पर उचित कार्रवाई की मांग की है ताकि आम जनता और प्रशासन को गुमराह करने वालों पर सख्त कदम उठाए जा सकें। प्रदीप पवार का कहना है इस मामले में प्रशासन की सक्रियता और निष्पक्षता जरूरी है ताकि धार्मिक स्थल पर अनाधिकृत कब्जे और दान-दक्षिणा की अवैध वसूली जैसी गतिविधियों पर रोक लगाई जा सके।




