बोल बच्चन साधुकर एक काल्पनिक मित्र
आलेख- ऋषि सहगल आमला

वैसे तो इनका बहुत बड़े बड़े लोगो से पहचान और उठना बैठना है, ये इतने न्यायप्रिय व्यक्तित्व के इंसान है की ये शासकीय पैसों का गबन करके पेरोल पर घूम रहे है, और उसपर अपनी ऊंची शान समझते है।
लेकिन इसमें इनका कोई दोष नही क्योंकि ये अपनी फर्जी लेखनी के दम पर दबंग बोल बच्चन साधूकर बनकर किसी भी फर्जी मुद्दे को बड़ा बना कर डरा धमका कर पैसा वसूल करते है।
ये अपनी न्यायप्रिय ऊंची उड़ान के दम पर किसी की भी अड़ी बाजी करते है, और इनको लगता है मेरा कोई कुछ नही कर सकता। साधूकर जी सारे अवैध धंधे करते है, घर से दारू बेचते है, फर्जी नंबर वाली गाड़ी से घूमते है, और सूत्रों के हवाले से आजकल न्याय की दलाली का धंधा भी खूब फलफुल रहा है, लेकिन अन्याय होता नही देख सकते, लोग अपने फायदे के लिए इनका भरपूर इस्तेमाल करते है, लेकिन साधुकर जी ये नही समझते की जिस दिन विपदा आएगी ये पहचान और झूठी शान धरी की धरी रह जाएगी, क्योंकि ये एक बलि का बकरा है जिसको खूब खिलाया पिलाया जा रहा है ! भगवान इन्हे सतबुद्धि दे।
इस कहानी का किसी व्यक्ति से कोई संबंध नहीं है ।
धन्यवाद।
आलेख- ऋषि सहगल आमला




