Shri Ram’s Baraat : श्री राम की बरात निकली, उत्साह के साथ शामिल हुए भक्त,श्रद्धालुओं ने पुष्प वर्षा से किया स्वागत

श्री कृष्ण पंजाब सेवा समिति ने निकाली राम बरात

 Shri Ram’s Baraat : बैतूल। मध्य प्रदेश के बैतूल जिले में रविवार को गंज स्थित पंजाबी कृष्ण मंदिर से बीती रात श्री कृष्ण पंजाब सेवा समिति द्वारा भगवान श्रीराम की भव्य बरात निकाली गई, जिसने पूरे शहर को धर्ममय बना दिया। भगवान राम का रूप धारण किए कलाकार बग्घी पर सवार होकर जब बारात लेकर निकले तो हर कोई उनकी एक झलक पाने के लिए उत्साहित दिखा। शिवजी का धनुष तोड़ने के बाद भगवान राम दूल्हा बने और सीता माता से विवाह करने जनकपुरी पहुंचे। इस अवसर पर बाराती के रूप में केवल आयोजन समिति के पदाधिकारी ही नहीं, नगर के नागरिक भी शामिल हुए। रास्तेभर बारात का विभिन्न संस्थाओं और नगरवासियों द्वारा भव्य स्वागत किया गया।
श्री कृष्ण पंजाब सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित रामलीला के पांचवें दिन श्रीराम विवाह और राम कलेवा की रस्में धूमधाम से सम्पन्न हुईं। इस अवसर पर आयोध्यापुरी (पंजाबी कृष्ण मंदिर) से श्रीराम की भव्य बारात निकाली गई, जिसमें श्रद्धालुओं को भी सीधे तौर पर बाराती बनने का मौका मिला। इससे पहले, पंजाबी कृष्ण मंदिर परिसर में दोपहर के समय भंडारे का आयोजन किया गया। शाम को राम बारात धूमधाम से निकाली गई।
दूल्हा बने भगवान श्रीराम रथ में सवार थे और उनके साथ लक्ष्मण जी, भरत जी, शत्रुघ्न जी और गुरु वशिष्ठ भी शामिल थे। बारातियों के रूप में श्री कृष्ण पंजाब सेवा समिति के पदाधिकारी, जनप्रतिनिधि और नगरवासी मौजूद थे। बैंड-बाजे की धुन पर बाराती झूमते हुए आगे बढ़े, जबकि युवा और बच्चे गरबा डांडिया करते हुए आकर्षण का केंद्र बने। बारात को देखने के लिए सड़कों और घरों के सामने बड़ी संख्या में लोग उमड़े और भगवान राम की मोहक छवि को निहारते रहे।
बारात का पूरे मार्ग पर जगह-जगह पुष्प वर्षा से स्वागत किया गया। विभिन्न संस्थाओं और समाजसेवियों ने बारातियों को जलपान कराया। जब रामजी की बारात जनकपुरी (माता मंदिर पेट्रोल पंप) पहुंची, तो वहां के निवासियों और समिति पदाधिकारियों ने बारातियों का आत्मीय स्वागत किया। प्रभु श्रीराम और माता सीता का विधि-विधान के साथ विवाह सम्पन्न कराया गया, जिसमें विवाह की सभी रस्में पूरी की गईं। विवाह के पश्चात बारात वापस रामलीला मंच पर लौटी, जहां पारंपरिक विवाह रस्मों का मंचन किया गया। श्रद्धालुओं को ऐसा अनुभव हुआ मानो वे किसी वास्तविक विवाह समारोह में शामिल हो रहे हों।

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