वक्फ कानून समेत 12 मांगों के समर्थन में भारत मुक्ति मोर्चा-राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा ने किया प्रदर्शन
सीएए-यूसीसी-वक्फ कानून वापस लेने की मांग, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

बैतूल। भारत मुक्ति मोर्चा और राष्ट्रीय मुस्लिम मोर्चा के संयुक्त आह्वान पर मंगलवार को बैतूल सहित देशभर में राष्ट्रव्यापी धरना-प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन के बाद कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति के नाम 12 सूत्रीय ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन में सीएए, यूसीसी और वक्फ संशोधन अधिनियम-2025 को वापस लेने, धार्मिक स्वतंत्रता की सुरक्षा, मॉब लिंचिंग पर सख्त कानून, जातिगत जनगणना और सामाजिक न्याय से जुड़ी प्रमुख मांगें उठाई गईं।
संगठन ने कहा कि प्रदर्शन का उद्देश्य संविधान के मूल सिद्धांतों, समानता और धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करना है। प्रदर्शन में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, मुस्लिम, ईसाई, बौद्ध और सिख समाज के लोगों ने भाग लिया। प्रदर्शनकारियों ने भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का संदेश देते हुए राष्ट्रपति से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।
ज्ञापन में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए), समान नागरिक संहिता (यूसीसी) और वक्फ संशोधन अधिनियम-2025 को वापस लेने की मांग की गई। संगठन का कहना है कि ये कानून संविधान की मूल भावना और देश की बहुलतावादी व्यवस्था के विपरीत हैं। साथ ही अनुच्छेद 25 से 29 के तहत धार्मिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक अधिकारों का पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित करने की मांग भी रखी गई।
संगठन ने मॉब लिंचिंग और गौकशी के नाम पर होने वाली हिंसा पर प्रभावी कानून बनाने, बेगुनाह मुस्लिम युवाओं और उलमाओं की निष्पक्ष जांच कर रिहाई की मांग की। महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, गुजरात, राजस्थान, उत्तरप्रदेश सहित विभिन्न राज्यों में मस्जिदों, दरगाहों, चर्चों और गुरुद्वारों पर बुलडोजर कार्रवाई रोकने तथा प्लेसेस ऑफ वर्शिप एक्ट-1991 का सख्ती से पालन कराने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही, ताकि 15 अगस्त 1947 की धार्मिक स्थिति बरकरार रखी जा सके।
– जातिगत जनगणना और आयोगों की सिफारिशें लागू करने की मांग
ज्ञापन में जातिगत जनगणना कराकर सभी वर्गों को जनसंख्या के अनुपात में शासन, प्रशासन और रोजगार में भागीदारी देने, अनुच्छेद 341(3) की धार्मिक पाबंदी समाप्त कर आरक्षण का लाभ देने तथा गोपाल सिंह, सच्चर, मिश्रा और कुंडू आयोग की सिफारिशें लागू करने की मांग की गई। इसके साथ ही *कम्यूनल वायलेंस प्रिवेंशन एक्ट बनाकर उसे लागू करने,* सांप्रदायिक नफरत फैलाने वाले संगठनों पर प्रतिबंध लगाने तथा पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब और बहुजन महापुरुषों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने वालों, जिनमें नाजिया इलाही और विधायक राजा सिंह का भी उल्लेख किया गया, पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग उठाई गई।
– संविधान बचाने किया आंदोलन
भारत मुक्ति मोर्चा ने कहा कि यह आंदोलन सामाजिक न्याय, समान अधिकार और देश की साझा विरासत की रक्षा का अभियान है। संगठन ने आरोप लगाया कि धर्म और समाज के नाम पर विभाजनकारी माहौल बनाया जा रहा है तथा वक्फ संपत्तियों पर अवैध कब्जे और फर्जी लव जिहाद जैसे मुद्दों का राजनीतिक इस्तेमाल किया जा रहा है। संगठन ने राष्ट्रपति से इन सभी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई की अपेक्षा जताई।




