Betul’s soil became famous: तीर्थकर सेन ने स्थापत्य वेद विषय में प्राप्त की प्रथम श्रेणी

वैदिक साहित्य में बैतूल की माटी का नाम हुआ रोशन

बैतूल। मध्य प्रदेश की धरती पर सनातन संस्कृति की गूंज फिर से सुनाई दे रही है, जहां विज्ञान, कला और वाणिज्य के साथ युवा वैदिक साहित्य और प्राचीन ग्रंथों की ओर लौट रहे हैं। इसी कड़ी में बैतूल के होनहार छात्र तीर्थकर सेन ने अपनी उपलब्धि से बैतूल जिले का नाम रोशन किया है। महर्षि महेश योगी वैदिक विश्वविद्यालय, जबलपुर के वर्ष 2024 के परीक्षा परिणाम में तीर्थकर सेन ने स्थापत्य वेद विषय में प्रथम श्रेणी प्राप्त की है।

इस विषय के अंतर्गत विद्यार्थियों को वैदिक ग्रंथ विश्वकर्मा प्रकाश का अध्ययन करना होता है, जिसमें प्राचीन भारत के वास्तु शास्त्र और भवन निर्माण की परंपराओं का ज्ञान समाहित है। तीर्थकर ने इस चुनौतीपूर्ण परीक्षा में सफलता प्राप्त कर वैदिक ज्ञान और भारतीय संस्कृति के संरक्षण में अपना योगदान दिया है।

— संस्कृति से जुड़ी गहरी आस्था– 

गौरतलब है कि तीर्थकर सेन जिला न्यायालय बैतूल के वरिष्ठ अधिवक्ता भारत सेन के सुपुत्र हैं। तीर्थकर ने प्रारंभ से ही भारतीय संस्कृति और संगीत के प्रति रुचि दिखाई। उन्होंने प्रतिष्ठित आर्ट ऑफ लिविंग संस्था से जुड़कर आध्यात्मिकता और जीवन विज्ञान को आत्मसात किया। इसके अतिरिक्त, उन्होंने राजा मानसिंग तोमर सगीत विश्वविद्यालय ग्वालियर से शास़्त्रीय तबला वादन में संगीत विशारद की डिग्री प्राप्त की है। उनकी इस उपलब्धि पर परिवार, मित्रों और गुरुजनों ने हर्ष व्यक्त किया है। तीर्थकर ने बताया कि वैदिक ज्ञान जीवन को बेहतर बनाने का माध्यम है।

उन्होंने बताया महर्षि महेश योगी विश्वविद्यालय के स्थापत्य वेद पाठ्यक्रम में प्राचीन शास्त्रों का आधुनिक दृष्टिकोण से अध्ययन कराया जाता है। इसमें भवन निर्माण की वैदिक तकनीकों, दिशाओं, ऊर्जा संतुलन और वास्तुशिल्प की प्राचीन विधियों का ज्ञान दिया जाता है। तीर्थकर की इस सफलता ने जिले के अन्य युवाओं को भी प्रेरित किया है।

— संगीत से वैदिक ज्ञान तक का सफर– 

शास्त्रीय संगीत में निपुणता हासिल करने के बाद तीर्थकर ने स्थापत्य वेद में रूचि दिखाई। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति का हर पहलू, चाहे वह संगीत हो, कला हो, या वास्तुशास्त्र, एक दूसरे से गहराई से जुड़ा हुआ है।

तीर्थकर की सफलता पर उनके पिता भारत सेन ने गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि यह उपलब्धि उनके परिवार के साथ पूरे जिले के लिए गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा आधुनिक शिक्षा के साथ भारतीय परंपराओं और संस्कृति को सहेजते हुए भी सफलता के नए आयाम स्थापित किए जा सकते हैं।

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