Betul news: प्रतिदिन ड्यूटी के फरमान से कोटवारों की बढ़ी मुश्किलें  

बैतूल तहसील में रोजाना तैनाती से नाराज़, कोटवार संघ ने उठाई आवाज़

बैतूल। तहसीलदार बैतूल द्वारा शहरी और ग्रामीण क्षेत्र के महिला-पुरुष कोटवारों की प्रतिदिन ड्यूटी तहसील कार्यालय में लगाई जा रही है। इस फरमान के तहत, 5-6 ग्राम के कोटवारों को बारी-बारी से कार्यालय में ड्यूटी करनी पड़ती है, और अनुपस्थिति की स्थिति में पारिश्रमिक आहरण पर रोक तथा दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस आदेश के विरोध में मध्य प्रदेश कोटवार संघ, जिला बैतूल ने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा।

कोटवारों का कहना है कि बैतूल तहसील के अलावा अन्य किसी तहसील में कोटवारों की ऐसी ड्यूटी नहीं लगाई जा रही है। ग्रामीण क्षेत्र के कोटवारों को तहसील कार्यालय में 5 से 30 किलोमीटर दूर से आना पड़ता है, जिससे उन्हें कई बार साधन की कमी के कारण परेशानी होती है। कोटवारों को शासन से मात्र 1000 से 1200 रुपये मासिक पारिश्रमिक मिलता है, जो उनके परिवार के भरण-पोषण के लिए अपर्याप्त है।

कोटवार संघ की मांग है कि हर कोटवार को 300 रुपये प्रतिदिन किराया भत्ता दिया जाए, और तहसील कार्यालय में ड्यूटी के बाद शाम 5 बजे नगद भुगतान किया जाए। ज्ञापन में यह भी बताया गया है कि चुनाव, मेले, गणेश विसर्जन, दुर्गा विसर्जन, मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के कार्यक्रमों में भी कोटवार अपनी सेवाए देते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें कोई भत्ता नहीं मिलता।

कोटवारों ने यह भी कहा कि उन्हें गांव में पंचायत के कार्य, पटवारी, ग्राम सेवक, थाना, जिला पंचायत, जनपद पंचायत के शिविरों और सर्वे कार्यों में सहयोग करना होता है। इन सभी कार्यों के साथ-साथ उन्हें अपनी निजी खेती और पारिवारिक जिम्मेदारियों को भी निभाना पड़ता है, लेकिन लगातार ड्यूटी के चलते उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और आर्थिक तंगी भी हो रही है। ज्ञापन में तहसीलदार से अपील की गई है कि बैतूल तहसील के कोटवारों की प्रतिदिन ड्यूटी लगाना बंद की जाए।

ज्ञापन सौंपने वालों में जिला अध्यक्ष रामदास गुज़रे, सचिव लोकेश पाटिल, जिला उपाध्यक्ष गणेश चौकीदार, तहसील अध्यक्ष घोड़ाडोंगरी कन्हैया बानसे, तहसील अध्यक्ष शाहपुर गणेश कजोडे, तहसील अध्यक्ष आठनेर देवीदास मनोहरे, तहसील अध्यक्ष बैतूल सतीष गोरसकर, पूर्व जिला अध्यक्ष सुखलाल पाटिल, पूर्व जिला अध्यक्ष मानिकराव वामनकर, महिला संगठन से गीता चनदेलकर, होलिका गोहे, शिवरती, लता बेले, फूलवती निरापुरे, हार्दिक सोनारे, मानिकराव बेले, कोषाध्यक्ष अशोक जावलकर, महेंद्र खाडे, सुखदेव आसरेकर, अजय नागले एवं अन्य कोटवार साथी शामिल थे।

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