खेड़ीरामोशी की घटना में आदिवासियों पर हमले का आरोप।

पीड़ितों पर दर्ज एफआईआर निरस्त करने की मांग। आदिवासी कांग्रेस ने एसपी को सौंपा ज्ञापन। निष्पक्ष जांच और आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग।

बैतूल। मासोद के पास ग्राम खेड़ीरामोशी में आदिवासियों के साथ कथित मारपीट और उत्पीड़न के मामले में मध्यप्रदेश आदिवासी कांग्रेस ने पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग की है। ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि 24 मार्च को भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष भास्कर मगरदे, ग्राम कामथ निवासी संतोष पंवार सहित 10-12 लोगों ने प्रशासनिक अमले के साथ गांव पहुंचकर आदिवासी परिवारों पर हमला किया।

ज्ञापन के अनुसार आरोपियों ने वृद्धों और महिलाओं के साथ अभद्रता करते हुए मारपीट की और जातिसूचक गालियां दीं। जेसीबी और वाहनों के साथ पहुंचे लोगों ने गांव में भय का माहौल बनाया तथा संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया। आरोप है कि राजनीतिक दबाव के चलते पुलिस ने पीड़ित आदिवासियों के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर दी, जिससे वे न्याय के लिए भटक रहे हैं।

आदिवासी कांग्रेस ने मामले को सुनियोजित बताते हुए कहा कि इससे पहले भी आदिवासी भूमि से जुड़े विवाद सामने आ चुके हैं। संगठन ने आरोप लगाया कि इस घटना में गोंड जनजाति के निर्दोष ग्रामीणों, महिलाओं और बुजुर्गों के साथ मारपीट कर सामाजिक अपमान किया गया और जान से मारने की धमकियां दी गईं।

ज्ञापन में मांग की गई है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी या स्वतंत्र एजेंसी से कराई जाए। साथ ही आरोपियों पर भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं और अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत प्रकरण दर्ज किया जाए। पीड़ित पक्ष के खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने, प्रभावित परिवारों को सुरक्षा देने, संपत्ति नुकसान का आकलन कर मुआवजा दिलाने और संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की भी मांग की गई है।

यह ज्ञापन प्रदेश आदिवासी कांग्रेस अध्यक्ष रामू टेकाम, जिला कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष निलय डागा और पूर्व कैबिनेट मंत्री सुखदेव पांसे के नेतृत्व में सौंपा गया।

– राजनीतिक दबाव में पीड़ित पक्ष के खिलाफ ही झूठी दर्ज कर दी एफआईआर

ज्ञापन में आरोप लगाया गया कि 24 मार्च को भारतीय जनता युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष भास्कर मगरदे, ग्राम कामथ निवासी संतोष पंवार सहित 10-12 लोगों ने प्रशासनिक अमले के साथ गांव पहुंचकर आदिवासी परिवारों पर हमला किया। आरोप है कि इस दौरान महिलाओं, बुजुर्गों और ग्रामीणों के साथ मारपीट, जातिसूचक गालियां, अभद्रता और जान से मारने की धमकियां दी गईं, साथ ही जेसीबी के माध्यम से संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर गांव में दहशत का माहौल बनाया गया। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि राजनीतिक दबाव में पीड़ित पक्ष के खिलाफ ही झूठी एफआईआर दर्ज कर दी गई, जिससे प्रभावित परिवार न्याय के लिए भटक रहे हैं। आवेदन में गोमजी पोलजी सहित ग्राम के कई बुजुर्ग आदिवासियों के नाम दर्ज करते हुए निष्पक्ष जांच, आरोपियों पर आईपीसी और एससी-एसटी एक्ट के तहत कार्रवाई, झूठी एफआईआर निरस्त करने, पीड़ितों को सुरक्षा और मुआवजा दिलाने तथा संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग की गई है।

ज्ञापन देने वालों में सुखदेव पांसे, रामू टेकाम प्रदेश अध्यक्ष, आदिवासी कांग्रेस, निलय डागा जिला कांग्रेस अध्यक्ष, हेमन्त वागद्रे राष्ट्रीय समन्वयक, ओबीसी कांग्रेस, नवनीत मालवीय, हेमंत पगारिया, संजय यादव, मनोज मालवे, राहुल उइके, नितिन गाडरे, अनुराग मिश्रा, पुष्पा मर्सकोले, अरुण यादव, विजय भावसार, रानू ठाकुर, राजेश गावण्डे, किशोर परिहार, डॉ. नितिन देशमुख, डॉ. रमेश काकोड़िया, राजा सोनी, नीरज राठौर, मिथिलेश सिंह, रामचरण इरपाचे, अतुल शर्मा, मुन्नालाल वाड़िवा, सोनू, राजकुमार मर्सकोले, गोविन्द पन्द्राम, सेंटी वाघमारे, मोनू बड़ोनिया, संजय साहू, कालू आहूजा, मनीष देशमुख, मनीष नागले, रामा काकोड़िया, किशोर माथनकर सहित सैकड़ों कांग्रेसजन उपस्थित थे।

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