30th anniversary: शिक्षा और संस्कारों की मिसाल बना छत्रपति शिवाजी विद्या मंदिर, वार्षिकोत्सव में अतिथियों ने की सराहना

Children presented wonderful cultural programs in the 30th anniversary

बच्चों में प्रतियोगिता की भावना का विकास होना चाहिए: हेमंत खंडेलवाल

30वें वार्षिकोत्सव में बच्चों ने प्रस्तुत किए मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम
विधायक हेमंत खंडेलवाल ने बच्चों को दी जा रही शिक्षा और संस्कारों की प्रशंसा की
बैतूल। छत्रपति शिवाजी विद्या मंदिर हाई स्कूल ने अपने 30वें वार्षिकोत्सव को धूमधाम से मनाया। यह भव्य कार्यक्रम 8 जनवरी को दोपहर 12 बजे आयोजित किया गया, जिसमें मुख्य अतिथि के रूप में बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल उपस्थित रहे। विशेष अतिथि पूर्व भाजपा जिला अध्यक्ष जितेंद्र कपूर थे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता क्षत्रिय लोणारी कुनबी समाज के जिला अध्यक्ष दिनेश मस्की ने की। आयोजन समिति ने सभी अतिथियों और दानदाताओं का शाल और श्रीफल भेंटकर स्वागत किया। स्कूल के बच्चों ने रंगारंग और मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए, जिनकी सभी ने सराहना की। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि बैतूल विधायक हेमंत खंडेलवाल ने विद्यालय में बच्चों को दी जा रही शिक्षा और संस्कारों की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि बच्चों में प्रतियोगिता की भावना का विकास होना चाहिए और संस्कृति के उत्थान के लिए प्रेरणादायक प्रयास किए जाने चाहिए। उन्होंने विद्यालय को आवश्यक सहयोग प्रदान करने का आश्वासन दिया। विशेष अतिथि जितेंद्र कपूर ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालते हुए विद्यालय की गतिविधियों में हरसंभव सहयोग देने की बात कही। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे दिनेश मस्की ने विद्यालय की उपलब्धियों की सराहना करते हुए इसे एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया। उन्होंने भी विद्यालय को पूर्ण सहयोग देने का वादा किया। इस अवसर पर समाजसेवी संगीता घोड़की ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले बच्चों को पुरस्कृत कर सम्मानित किया। कार्यक्रम को सफल बनाने में अध्यक्ष पी. आर. मगरदे, समिति के पी.आर. धोटे, नारायण चढ़ोकार, रविशंकर पारखे, हेमंत चिल्हाटे, ए.के. दवंडे, रामराव कनाठे, कुंडलिक डांगे, प्राचार्य सुखदेव कावड़कर, संगीता घोड़की, नीलम वागद्रे, हेमलता कुंभारे सहित विद्यालय के सभी शिक्षकों और समिति सदस्यों का योगदान सराहनीय रहा। विद्यालय के 30वें वार्षिकोत्सव ने शिक्षा, संस्कार और संस्कृति का अद्भुत संगम प्रस्तुत कर इसे यादगार बना दिया।

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