Collector’s Strictness : थैंक्स कलेक्टर साहब, जाम चौक से हलाकान जनता दे रही धन्यवाद
पहली बार बडोरा को अतिक्रमण से पूरी तरह मुक्त करने शुरू किया गया है अभियान

Betul News Today : बैतूल शहर का हिस्सा बन गए बडोरा क्षेत्र की बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जे कर कारोबार करने वालों को कई वर्षाें से पोषण मिल रहा था। इसका नतीजा यह हो गया था कि बडोरा चौक का नाम लोगों ने जाम चौक ही रख डाला। प्रशासनिक अधिकारी हों या पुलिस के छोटे और बड़े अधिकारी ही क्यों न हों। कभी न कभी वे बडोरा में लगने वाले जाम में फंसे जरूर होंगे। लेकिन किसी ने कभी सड़क तक पसरे अवैध कब्जों को हटाने के लिए प्रयास ही नहीं किया।

नवागत कलेक्टर नरेन्द्र कुमार सूर्यवंशी ने कार्यभार संभालने के कुछ दिन बाद ही बडोरा को जाम चौक से मुक्त करने का अभियान प्रारंभ करा दिया। तीन दिन से लगातार बुलडोजर और ब्रेकर मशीनें नासूर बन गए अवैध कब्जों को तोड़ने का काम कर रही हैं। बडोरा चौक से होकर हर दिन आवाजाही करने वाले करीब 10 से 15 हजार लोग बडोरा चौक और बैतूलबाजार मार्ग के बदले स्वरूप को देखकर मन ही मन कह रहे हैं थैंक्स, कलेक्टर साहब…..
बडोरा में हो रही कार्रवाई को देखकर लोगों को पूर्व में कलेक्टर रहे बी चंद्रशेखर की याद जरूर आ रही है। सापना जलाशय की बटामा नहर को अतिक्रमण से मुक्त करने के लिए उनके द्वारा चलाए गए अभियान का ही नतीजा रहा था कि बटामा नहर के टेल क्षेत्र तक अवैध कब्जे हटाकर पानी पहुंचा दिया गया था। इसके बाद जल संसाधन विभाग के द्वारा अतिक्रामकों के हवाले नहर छोड़ दी गई और कई कालोनियों से लेकर पक्के निर्माण नहर और उसके दोनों किनारों की 60 फीट जमीन पर कर लिए गए। अब न तो बटामा नहर नजर आती है और न ही उसके आसपास की जमीन ही कहीं दिखती है।
वर्ष 2011-12 में तत्कालीन कलेक्टर बी. चंद्रशेखर के द्वारा बटामा नहर को अतिक्रमण से मुक्त कराने की कार्रवाई कराई गई थी। जल संसाधन विभाग को उस समय पूरी नहर कब्जे से मुक्त कराकर दे दी गई थी और इस नहर से सिंचाई का लाभ लेने वाले 90 से अधिक किसानों के खेतों तक पानी भी पहुंचाया गया था। इसके बाद जल संसाधन विभाग ने नहर की जमीन को सुरक्षित और संरक्षित रखने में कोई रूचि नहीं दिखाई जिसके चलते अब कालोनियों का बेखौफ तरीके से निर्माण किया जा रहा है।
60 फीट चौड़ी थी बटामा नहर
सापना जलाशय की बटामा नहर की लंबाई डेढ़ किलोमीटर है और इसकी चौड़ाई 60 फीट है। हाइवे से सटी इस बेशकीमती जमीन पर कब्जा कर कालोनियों का निर्माण करने वालों को करोड़ों का लाभ हो रहा है लेकिन जल संसाधन विभाग आंखे बंद किए बैठा हुआ है। प्रशासनिक अफसर भी बेशकीमती शासकीय जमीन पर हो रहे कब्जे को हटाने की बजाय कालोनियों का निर्माण करने से लेकर नहर की भूमि पर पुलिया बनाने की अनुमति दी जा रही है।




