Election News : आमला विधानसभा क्षेत्र में उजड़ते सारनी और विकास की धीमी रफ्तार का मुद्दा छाया

Betul Election News : बैतूल। विधानसभा चुनाव के लिए प्रत्याशियों के द्वारा किया जा रहा प्रचार अभियान अंतिम दौर में पहुंच गया है। बुधवार को शाम छह बजे से प्रचार का शोर भी बंद हो जाएगा और इसके बाद प्रत्याशियों के राजनीतिक भविष्य का पूरा दारोमदार मतदाताओं के कंधे पर आ जाएगा।बैतूल जिले में पिछले चुनाव में भाजपा काे जिस एकमात्र आमला विधानसभा सीट पर जीत हासिल हुई थी वहां पर पांच वर्ष में विकास की धीमी रफ्तार और उजड़ते सारनी-पाथाखेड़ा क्षेत्र का मुद्दा छाया हुआ नजर आ रहा है।

पूर्व डिप्टी कलेक्टर निशा बांगरे की आमला सीट से चुनाव लड़ने की महत्वाकांक्षा के कारण पूरे देश में चर्चित हो गई आमला विधानसभा सीट पर भाजपा ने एकमात्र सीट जीतने वाले विधायक डा योगेश पंडाग्रे को दूसरी बार भी मौका देकर मैदान में उतारा है। कांग्रेस ने भी पिछली बार हार का स्वाद चख चुके मनोज मालवे को ही अंतिम समय में अपना प्रत्याशी घोषित किया है। पांच वर्ष से जिस आमला सीट पर भाजपा काबिज है वहां पर जीत का दोहराने के लिए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह को सभा लेने के लिए आना पड़ गया। हालांकि सभा में जो चमक-दमक दिखाई देनी थी वह बेहद धुंधली थी। इससे आमला शहर ही नहीं पूरे विधानसभा क्षेत्र में लोगों के मन में क्या चल रहा है इसका अनुमान राजनीति के जानकार लगा रहे हैं। कांग्रेस के प्रत्याशी अपने दम पर ही चुनाव लड़ते नजर आ रहे हैं। बुधवार को कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की सभा का आयोजन होना था लेकिन ऐन वक्त पर उसे निरस्त कर दिया गया। इसका क्या असर पड़ता है यह तो भविष्य के गर्त में है।

राजनीतिक समझ रखने वालों की मानें तो कांग्रेस के द्वारा प्रचार के दौरान आमला विधानसभा क्षेत्र से पहली बार जीत दर्ज करने वाले प्रत्याशी के बाहरी होने, अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में कारोबार को बढ़ाने के आरोप लगा रहे हैं।इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की धीमी रफ्तार को लेकर भी आम मतदाताओं को उदाहरण देकर उनका मन परिवर्तन करने का काम हो रहा है। सबसे बड़ा मुद्दा भाजपा के परंपरागत गढ़ माने जाने वाले सारनी और पाथाखेड़ा क्षेत्र में बढ़ती बेरोजगारी का छाया हुआ है। सारनी में नई बिजली उत्पादन की इकाई की घोषणा तो हो गई लेकिन इससे कितने लोगों को रोजगार मिलेगा इसे लेकर सवाल उठ रहे हैं। कोयले की खदानों में रोजगार के साधन कम होते जा रहे हैं और इसका असर पूरे सारनी और पाथाखेड़ा क्षेत्र में बाजार पर हो रहा है।

भाजपा प्रत्याशी के द्वारा इन सवालों का जवाब देने का भरसक प्रयास तो किया जा रहा है लेकिन आम मतदाता कितना संतुष्ट हो रहा है इसका आकलन नहीं लगाया जा सकता है।पिछले चुनाव में गोंगपा के प्रत्याशी को मिले वोट से कांग्रेस को खासा नुकसान उठाना पड़ गया था। इस बार कांग्रेस प्रत्याशी के साथ गाेंगपा की टिकट पर चुनाव लड़ने वाले प्रचार कर रहे हैं। इससे परिणाम पर कितना असर होगा यह नतीजे ही तय कर पाएंगे। कुल मिलाकर आमला विधानसभा सीट पर जो स्थिति नजर आ रही है उससे मुकाबला आमने-सामने का होने की संभावना है।

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