Drama : सुखिया की मौत को झुठलाने एक हुए नौकरशाह 

नाटक " सुखिया मर गया भूख से" का हुआ मंचन

BETUL NEWS : बैतूल। आदिम कल्चरल एंड वेलफ़ेयर सोसायटी एवं बालाजी कंस्ट्रक्शन कंपनी घोड़ाडोंगरी के सहयोग से   अग्रसेन भवन घोड़ाडोंगरी में राकेश वरवड़े एवं कलीम ज़फ़र द्वारा निर्देशित और राजेश कुमार द्वारा लिखित नाटक “सुखिया मर गया भूख से” का मंचन किया गया।सुखिया उन किसानों की आवाज़ है जो क़र्ज़ से तंग आकर आत्महत्या कर लेते हैं अथवा भूख से मर जाते हैं।

एक गरीब किसान की भूख से मृत्यु हुई। इस घटना के सच को दबाने और उसे पलटने के लिए नौकरशाही द्वारा जो कुचक्र रचा गया, यह नाटक इसी सच्ची घटना पर आधारित है। अन्नदाता का भूख से मरना विकसित समाज के लिए एक बड़ा प्रश्नचिह्न है। यह एक व्यंग्य नाटक है जो कि सुखिराम उर्फ़ सुखिया के मरने के बाद शुरू होता है जो कि भूख से मर चुका है और वह यमराज के आने का इंतज़ार कर रहा है ताकि उसकी आत्मा को यमराज ले जा सके।
भूख से मरने पर पूरे प्रदेश में हड़कंप मच जाता है कि एक किसान कैसे भूख से मर गया? और प्रशासन सुखिया की मौत को झुठलाने के लिए कैसे-कैसे हथकंडे अपनाता है। उसे हास्य और व्यंग्य के माध्यम से बताया गया है। इस नाटक के अंत में यमराज सुखिया की आत्मा लेने आता है पर वह और उसके जैसी आत्मा यमराज के साथ जाने पर यह कहकर विद्रोह कर देते हैं कि जब तक वह भूख से मुक्त नहीं हो जाते तब तक वापस नहीं जाएंगे।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button