Lokayukta Team Caught : सीएमएचओ बैतूल के लिए रिश्वत ले रहा था लैब टेक्नीशियन, लोकायुक्त टीम ने पकड़ा

निजी क्लीनिक संचालक से मांगे थे डेढ़ लाख रुपये, एक लाख रुपये में तय हुई थी डील

Lokayukta caught: बैतूल। जिले के भौंरा में निजी अस्पताल के पंजीयन दस्तावेजों में डाक्टर के भतीजे का नाम शामिल करने के लिए 40 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र शाहपुर में पदस्थ लैब टेक्नीशियन राधा गोविंद शुक्ला को लोकायुक्त भोपाल की टीम ने गुरुवार को पकड़ा है। इस मामले में सीएमएचओ डा सुरेश बौद्ध जाटव को मुख्य आरोपी बनाया जाएगा।

लोकायुक्त भोपाल के टीआई मनोज पटवा ने बताया कि बैतूल जिले के भौंरा में स्थित डा महेश पाटनकर के निजी क्लीनिक के पंजीयन दस्तावेजों में उनके भतीजे डा सागर पाटनकर का नाम जोड़ने के लिए सीएमएचओ डा सुरेश बौद्ध जाटव के द्वारा डेढ़ लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई थी। चर्चा के बाद मामला एक लाख रुपये में तय हुआ था। डा पाटनकर ने 50 हजार रुपये सीएमएचओ को पूर्व में दे दिए थे। तीन अगस्त 2023 को सीएमएचओ को 10 हजार रुपये बैतूल में दिए गए। शेष 40 हजार रुपये की राशि शाहपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ लैब टेक्नीशियन राधा गोविंद शुक्ला को देने के लिए कहा गया था। इस मामले की शिकायत डा पाटनकर के द्वारा 28 जुलाई को लोकायुक्त भोपाल से की गई थी।

इसके बाद लाेकायुक्त की टीम ने रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ने की योजना तैयार की। गुरुवार को जब डा पाटनकर के द्वारा 40 हजार रुपये की रिश्वत शाहपुर के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ लैब टेक्नीशियन राधागोविंद शुक्ला को दी तो तत्काल ही टीम ने मौके पर पहुंचकर उसे दबोच लिया। पूछताछ में उसके द्वारा स्वीकार किया गया कि सीएमएचओ सुरेश बौद्ध जाटव के कहने पर उसके द्वारा 40 हजार रुपये लिए गए हैं।

लोकायुक्त टीआई मनोज पटवा ने बताया कि इस मामले में मुख्य आरोपित सीएमएचओ सुरेश बौद्ध जाटव को बनाया गया है। टीम के द्वारा बैतूल कार्यालय पहुंचकर कार्रवाई की जाएगी, फिलहाल लोकायुक्त की टीम शाहपुर में कार्रवाई कर रही है। इस मामले में सीएमएचओ कार्यालय के लिपिक मालवीय की भूमिका भी पाई गई है।

लोकायुक्त की टीम के द्वारा अभी जांच की जा रही है और उसके बाद इसे भी आरोपी बनाया जा सकता है। बताया गया है कि कुछ दिन पहले स्वास्थ्य विभाग की टीम ने भौंरा में क्लीनिक का निरीक्षण किया गया था। इसमें कमी पाई गई थी। इसी के बाद कमियों को दूर करने के नाम पर रिश्वत की मांग की गई थी।

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