कविताओं में दिखा बदलते समाज का आईना, वाल्मीकि जयंती पर जुटीं सृजन साहित्य कुंज की साहित्यकार सखियां
नेहरू पार्क में सजी शब्दों की महफिल,कवयित्रियों ने रचनाओं से बांधा समां, कविताओं के जरिए संस्कारों और सामाजिक बदलाव पर हुआ मंथन

बैतूल। महर्षि वाल्मीकि के जीवन में आए परिवर्तन, उनकी ऋषि बनने की यात्रा और रामायण की रचना से लेकर आज के बदलते सामाजिक परिवेश और संस्कारों तक, विभिन्न विषयों पर काव्य प्रस्तुतियों के साथ सृजन साहित्य कुंज की मासिक बैठक आयोजित की गई। वाल्मीकि जयंती के अवसर पर नेहरू पार्क में हुई इस बैठक में साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से सामाजिक सरोकारों, जीवन मूल्यों और बदलते दौर की चुनौतियों को अभिव्यक्त किया। बैतूल से बाहर निवासरत साहित्यकार सखियां भी ऑनलाइन जुड़ीं।
बैठक में सर्वप्रथम महर्षि वाल्मीकि के जीवन पर चर्चा की गई। उनके जीवन में आए बदलाव और एक सामान्य व्यक्ति से ऋषि बनने की यात्रा के साथ रामायण की रचना के प्रसंग पर विचार रखे गए। इसके बाद महर्षि वाल्मीकि को नमन कर काव्य पाठ का दौर शुरू हुआ। विजी अशोक ने संस्कारों में आ रही कमी पर कविता प्रस्तुत कर आज के बदलते परिवेश पर सवाल उठाए। अतिथि अनीता जैन ने सांसों का क्या भरोसा कविता सुनाई। विद्या निर्गुडकर ने ऑनलाइन जुड़कर वाल्मीकि जयंती के महत्व पर प्रकाश डाला, जबकि दीपा मालवी ने शिवशक्ति कविता के माध्यम से वातावरण को भक्तिमय बनाया।
माधवी ठाकुर ने आज के बच्चों में बदलते संस्कारों पर काव्य पाठ किया। ललिता कोसे ने चेहरे पर मुस्कान होनी चाहिए- कविता के जरिए हर परिस्थिति में मुस्कुराते रहने का संदेश दिया। चित्रा धोटे ने ऑनलाइन परिवार और संस्कार विषय पर अपनी कविता प्रस्तुत की। मीरा एंथोनी ने मौजूदा अफरातफरी के दौर में ठगी के सवाल को उठाते हुए जनता की कसौटी कविता सुनाई। इंदौर से ऑनलाइन जुड़ी सरोजिनी कावले ने जीवन विषय पर काव्य पाठ किया।
प्रतिभा देशपांडे ने ऑनलाइन जुड़कर सभी को शरद पूर्णिमा की शुभकामनाएं दीं। अरुणा पाटणकर ने भी शरद पूर्णिमा की शुभकामनाएं देते हुए शरद पूर्णिमा का चांद कविता सुनाई। उनकी प्रस्तुति ने बैठक में साहित्यिक उल्लास का माहौल बनाया।
बैठक के दौरान संस्था के वार्षिक कार्यक्रम के आयोजन की तिथि और स्थान को लेकर भी चर्चा की गई। अंत में सभी ने स्वल्पाहार किया और साहित्य सृजन की निरंतरता बनाए रखने की बात कहते हुए एक-दूसरे से विदा ली।




