दिल्ली में लोकार्पित हुई आशुतोष एवं प्रवीण गुगनानी की पुस्तक

कांस्टिट्युशन क्लब में हुआ विमोचन, दिग्गजों ने बताया उपयोगी संदर्भग्रंथ

बैतूल। बैतूल के आशुतोष गुगनानी एवं प्रवीण गुगनानी की पुस्तक जीएसटी रिफार्म्स 2025 वैदिक टैक्सेशन युवा कर राहत नीति का दिल्ली के प्रतिष्ठित कांस्टिट्युशन क्लब में विमोचन हुआ। हिंदी और अंग्रेजी में प्रकाशित इस पुस्तक में वैदिक कराधान, जीएसटी सुधारों, युवाओं को कर राहत, नई शिक्षा ऋण नीति और गिग वर्कर्स की सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया गया है।

उल्लेखनीय है कि इस पुस्तक की प्रस्तावना केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री एवं उत्तरप्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने लिखी है एवं इसकी भूरि-भूरि प्रशंसा की है। वित्त राज्यमंत्री एवं उप्र भाजपा अध्यक्ष ने अपनी प्रस्तावना में लिखा है कि यह पुस्तक पाठकों को वैदिक कालीन कर प्रणाली से लेकर भविष्य के जीएसटी सुधारों तक की सुरुचिपूर्ण यात्रा पर ले जाती है। यह पुस्तक नई पीढ़ी के लिए टैक्स विशेषज्ञों हेतु एक संदर्भग्रंथ का कार्य करेगी।

  इस अवसर पर आयोजन अध्यक्ष के रूप में किशोर मकवाना, अध्यक्ष राष्ट्रीय जनजाति आयोग, श्रीमती जोराम एनिया, सदस्य, नीति आयोग (प्लानिंग कमीशन ऑफ इंडिया) एवं प्रोफ. अश्विनी महाजन, अर्थशास्त्री, जीएसटी कौंसिल के सलाहकार एवं स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सहसंयोजक उपस्थित रहे।

इस अवसर पर राष्ट्रीय अजा आयोग अध्यक्ष किशोर मकवाना ने कहा कि जीएसटी के लागू होने एवं उसके 2025 के रिफार्म्स के बाद की परिस्थितियों को यह पुस्तक सटीक प्रकट करती है। वर्तमान जीएसटी में ‘वैदिक कराधान’ को खोजना एवं इस संदर्भ में सुझाव देने का महत्वपूर्ण कार्य इस पुस्तक ने किया है। प्राचीन भारत की मानवीय, संवेदनशील एवं व्यावहारिक कराधान प्रक्रिया आज भी वैश्विक स्तर पर एक सर्वस्वीकार्य व सर्व हितकारी कराधान व्यवस्था है। इस पुस्तक में भारत में कुटुंब परंपरा वाले परिवारों के व्यावसायिक सिस्टम का अध्ययन, रिपोर्ट एवं भविष्य के उपयोग हेतु योजना प्रस्तुत की गई है।

             अरुणाचल की प्रसिद्ध राजनीतिज्ञ एवं नीति आयोग की सदस्य जोराम एनिया ने कहा कि – यह पुस्तक भारत के राजनैतिक, आर्थिक एकीकरण के साथ-साथ भावनात्मक एकीकरण के बल को प्रकट करती है। लेखक आशुतोष एवं प्रवीण ने जीएसटी में युवा कर राहत नीति का जो स्वरूप प्रस्तुत किया है वह अभिनव एवं उपयोगी है।

           नीति आयोग (प्लानिंग कमीशन) की सदस्य ने यह भी कहा कि पुस्तक में इस बात की भी चर्चा है कि नई शिक्षा ऋण नीति से देश में ‘नई शिक्षा नीति’ और अधिक प्रभावी हो सकती है। जोराम एनिया ने कहा कि लेखक ने ‘नई शिक्षा ऋण नीति’ के प्रस्ताव से सामयिक व सटीक बात देश के समक्ष रखी है जिस पर विचार किया जा सकता है।

          अश्विनी महाजन ने जीएसटी कौंसिल के साथ चर्चाओं के अपने संस्मरण साझा किए। उन्होंने बताया कि किस प्रकार अंतिम दिनों में जीएसटी के सॉफ़्टवेयर में आई गड़बड़ी ने अरुण जेटली को परेशान कर दिया था फिर भी वे अटल रहे और समस्याओं को साधकर नियत तिथि पर उन्होंने जीएसटी को लागू कर दिया था।

              पुस्तक के लेखक एवं लियोन यूनिवर्सिटी, फ्रांस के विद्यार्थी रहे आशुतोष गुगनानी ने पुस्तक रचना के संदर्भ में बताते हुए कहा कि – इस पुस्तक लेखन के अनुभव ने उन्हें भारत का, उसकी वित्तीय सोच का व लक्ष्य का गहन अध्ययन करा दिया है।

                   जीएसटी रिफार्म्स के साथ-साथ इस पुस्तक में वैदिक कराधान, युवा कर राहत नीति, असंगठित क्षेत्र में कार्यरत युवाओं, गिग वर्कर्स की आर्थिक एवं जान-माल की सुरक्षा, नई शिक्षा ऋण नीति, राष्ट्रीय युवा संवाद एवं विवाह मंच जैसे नए विषय भी लिखे गए हैं।

         आयोजन संचालन कलाप्रेमी लेखक संघ के संयोजक एवं सोशल मीडिया एक्सपर्ट आशीष अंशु ने किया। अंत में प्रकाशक प्रशांत जैन ने सभी अतिथियों, आगंतुकों व लेखकों का आभार प्रकट किया।

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