सौर पैनल लगाने का झांसा देकर हड़पी किसान की पुश्तैनी जमीन, जनसुनवाई में शिकायत


बैतूल। मुलताई क्षेत्र में सौर पैनल लगाने का झांसा देकर मानसिक रूप से कमजोर किसान से पुश्तैनी कृषि भूमि की रजिस्ट्री कराने का मामला सामने आया है। पीड़ित परिवार ने मंगलवार को जिला कलेक्टर की जनसुनवाई में आवेदन देकर जमीन वापस दिलाने और संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। परिवार का आरोप है कि खेती के लिए जमीन ठेके पर लेने वाले व्यक्ति ने विश्वास का फायदा उठाकर एग्रीमेंट के नाम पर जमीन अपने नाम करा ली।
शिकायतकर्ता सिंधू डांगे (51) और उनके पुत्र सूरज डांगे (23), निवासी चंदन गांव, छिंदवाड़ा, ने आवेदन में बताया कि उनकी पुश्तैनी कृषि भूमि ग्राम आष्टा (मौजा राजनी), तहसील प्रभात पट्टन में स्थित है। खसरा नंबर 151/3 की 0.405 हेक्टेयर भूमि आपसी भाई-बंटवारे के बाद उनके हिस्से में आई थी। परिवार इस जमीन को मुलताई के सुभाष वार्ड निवासी राजेश पाल, पिता मधु पाल, को खेती के लिए ठेके पर देता था। पुराने परिचय और विश्वास के कारण परिवार को उस पर कोई संदेह नहीं था।
शिकायत के अनुसार, राजेश पाल ने सिंधू डांगे के पति श्रीराम डांगे को, जो अनपढ़ और मानसिक रूप से कमजोर हैं, मुलताई बुलाया। आरोप है कि वहां उन्हें बताया गया कि उनकी जमीन पर सौर पैनल लगाए जाने हैं और इससे उनकी आमदनी बढ़ेगी। इसके लिए एक रजिस्टर्ड एग्रीमेंट कराना जरूरी बताया गया। श्रीराम डांगे उसकी बातों पर विश्वास कर रजिस्ट्रार कार्यालय पहुंचे और दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कर दिए।
परिवार का आरोप है कि इसी दौरान एग्रीमेंट के नाम पर जमीन की रजिस्ट्री राजेश पाल के नाम करा दी गई। मामले की जानकारी तब हुई, जब परिवार ने खेती के ठेके की राशि मांगी। आरोप है कि राजेश पाल ने बताया कि उसने जमीन खरीद ली है और अब वह ठेके के पैसे नहीं देगा। परिवार के विरोध करने पर जमीन वापस करने का आश्वासन दिया गया, लेकिन दो साल से अधिक समय बीतने के बाद भी जमीन वापस नहीं की गई।
आवेदन में परिवार ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें लगातार डराया-धमकाया जा रहा है। साथ ही राजेश पाल पर इसी तरह उनकी सास और ससुर की जमीन भी अपने नाम कराने का आरोप लगाया गया है। मजदूरी कर जीवनयापन करने वाले परिवार ने कलेक्टर से पूरे मामले की जांच कर जमीन की रजिस्ट्री निरस्त कराने तथा दोषी पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।




