वट सावित्री पर्व पर सुहागिन महिलाओं ने की पति की दीर्घायु की कामना
लीला देव बाबा मंदिर में सामूहिक पूजन, वट वृक्ष की परिक्रमा कर मांगा अखंड सौभाग्य

बैतूल। वट सावित्री पर्व के अवसर पर विनोबा वार्ड स्थित लीला देव बाबा मंदिर में सुहागिन महिलाओं ने श्रद्धा और उत्साह के साथ वट सावित्री व्रत का पूजन किया। मंदिर परिसर में बड़ी संख्या में महिलाओं ने एकत्र होकर विधि-विधान से वट वृक्ष की पूजा-अर्चना की तथा अपने पति की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
लीला देव बाबा मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष अनिल राठौर ने बताया कि पर्व को लेकर मंदिर परिसर में पूजन की सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की गई थीं। महिलाओं ने वट वृक्ष की परिक्रमा कर रक्षा सूत्र बांधे और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ व्रत का पालन किया। इस अवसर पर राखी गुर्जर, सुनीता वागद्रे, सरिता वागद्रे, उमा भगत, अर्चना पंडाग्रे, सोनाली राठौर, नीलिमा पवार, मीना वागद्रे, सरिता धोटे, शारदा राठौर,पूजा सावनेर, रेणुका ठाकरे, वंदना गायकवाड़, सहित सैकड़ों महिलाओं ने सहभागिता की। कार्यक्रम की व्यवस्थाएं ज्योति राने और रीना घोडकी ने संभालीं।
हिंदू धर्म में वट सावित्री व्रत का विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, माता सावित्री ने अपने अटूट पतिव्रत, साहस और तप के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे। तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और वैवाहिक जीवन की सुख-समृद्धि के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है। वट (बरगद) वृक्ष को दीर्घायु, स्थिरता और जीवन शक्ति का प्रतीक माना गया है, इसलिए महिलाएं इसकी पूजा कर परिक्रमा करती हैं और परिवार के कल्याण की प्रार्थना करती हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए इस व्रत से दांपत्य जीवन में सुख, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति होती है तथा परिवार पर ईश्वर की कृपा बनी रहती है।





