वनाधिकार पट्टों के अभाव में उर्वरक संकट झेल रहे वनग्रामों के किसान।

वनग्राम दावेदारों को पट्टे दिलाने की मांग।  समाधान नही हुआ तो 5 दिन बाद होगा किसानों का आंदोलन ।

बैतूल। जिले के आमढाना वनग्राम में वनाधिकार पट्टों के अभाव में किसानों को कृषि कार्यों के लिए आवश्यक उर्वरक नहीं मिल पाने का मुद्दा एक बार फिर सामने आया है। जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) के प्रदेश संयोजक जामवंत सिंह कुमरे ने कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी बैतूल को ज्ञापन सौंपकर वन अधिकार कानून के पात्र दावेदारों को शीघ्र वनाधिकार पट्टे प्रदान करने तथा तब तक उन्हें डीएपी, यूरिया सहित अन्य कृषि आदानों की वैकल्पिक सुविधा उपलब्ध कराने की मांग की है।

सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि वनग्राम आमढाना, ग्राम पंचायत धामनिया एवं तहसील भैंसदेही के अनेक निवासी वन अधिकार कानून के अंतर्गत दावेदार हैं। इनके पास संबंधित भूमि के नक्शे एवं प्रमाण पत्र उपलब्ध हैं, लेकिन वनाधिकार पट्टे जारी नहीं होने के कारण वे कृषि विभाग से डीएपी, यूरिया सहित अन्य उर्वरकों का लाभ प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। इससे खेती-किसानी प्रभावित हो रही है।

ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि वन अधिकार कानून 2006 की धारा 2(ण) एवं धारा 4(3) के अनुसार अन्य परंपरागत वन निवासियों के लिए तीन पीढ़ियों के कब्जे का प्रावधान है। साथ ही ग्राम के पटवारी मानचित्र एवं खसरा पंजी में दर्ज भूमि के आधार पर व्यक्तिगत वनाधिकार दावे मान्य किए जाने का प्रावधान भी है। इस संबंध में मध्यप्रदेश शासन, राजस्व विभाग द्वारा 30 मई 2022 को जारी पत्र क्रमांक एफ-2-4/2014/7/261 का भी हवाला दिया गया है बावजूद पट्टे नही दे पाना वन विभाग और प्रशासन की लापरवाही है।

ज्ञापन में कहा गया कि वर्ष 1959 की भू-राजस्व संहिता के अंतर्गत दर्ज कई भूमि अभिलेखों में बाद में परिवर्तन कर कुछ भूमि को वनभूमि के रूप में दर्ज कर दिया गया, जबकि संबंधित परिवार दिसंबर 2005 तक उन जमीनों पर काबिज रहे हैं, बहुत सी जगहों पर भारी बरसात में बेदखली का आदेश भी दिया जा रहा ,किसानों को बेघर किया जा रहा है। ऐसे मामलों की जांच वन अधिकार कानून की धारा 5 से 9 के तहत लंबित है। अनुसूचित जनजाति एवं अन्य परंपरागत वन निवासी (वन अधिकारों की मान्यता) नियम 2008 के नियम 11(क) के अनुसार ऐसे पात्र व्यक्तियों को व्यक्तिगत वनाधिकार दावा प्रस्तुत करने का अधिकार प्राप्त है।

जयस ने प्रशासन से मांग की है कि जिलेभर में ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से पात्र दावेदारों के वनाधिकार पट्टों के सत्यापन और वितरण की विशेष मुहिम शीघ्र प्रारंभ की जाए। साथ ही पट्टा प्राप्त होने तक जरूरतमंद पट्टाविहीन किसानों को डीएपी, यूरिया एवं अन्य उर्वरकों की वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए, ताकि उनकी खेती प्रभावित न हो और आगामी कृषि सीजन में उन्हें किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

सोनू धुर्वे जयस युवॉ प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष ने कहा सरकार और प्रशासन पट्टे देने के मामले में उदासीनता दिखा रहा है, ऊपर से साल भर की खेती और पूँजी वाले समय मे खाद के लिये परेशान हो रहे है, यदि 5 दिन में खाद उपलब्घ करने कोई विकल्प नही निकाला जाता है तो आंदोलन के लिए जयस मजबूर होंगा।

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