धुडियानई के अमृत सरोवर निर्माण में तकनीकी मानकों के अनुसार नहीं डाली जा रही काली मिट्टी ।
ग्रामीणों का आरोप पथरीली जमीन पर नियम विरुद्ध बन रहा डैम- अधिकारी के जाते ही फिर शुरू हुई लीपापोती।

बैतूल। भैंसदेही क्षेत्र के धुडियानई स्थित अमृत सरोवर को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। लगभग 40 लाख रुपये की लागत से निर्मित अमृत सरोवर को लेकर ग्रामीणों और प्रशासन के दावों के बीच विरोधाभास सामने आ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि जिस निर्माण कार्य को पहले अधिकारियों द्वारा गुणवत्तापूर्ण बताया गया था, शिकायत के बाद अब उसी सरोवर में दोबारा मशीनों से खुदाई कराई जा रही है। इससे ग्रामीणों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुरूप था तो फिर दोबारा खुदाई और सुधार की आवश्यकता क्यों पड़ी।
ग्रामीणों के अनुसार शिकायत के बाद जिला पंचायत से अधिकारी मौके पर पहुंचे थे। निरीक्षण के दौरान सरोवर के ऊपरी हिस्से को पुनः खुदवाया गया और मशीनों की मदद से काम शुरू कराया गया। हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि अब भी निर्माण स्थल पर आवश्यक काली मिट्टी उपलब्ध नहीं है और न ही बाहर से पर्याप्त मात्रा में मिट्टी लाई गई है। उनका कहना है कि पथरीले क्षेत्र में केवल ऊपरी सतह की खुदाई कर कार्य को सुधारने का प्रयास किया जा रहा है, जबकि मूल समस्या जस की तस बनी हुई है।
ग्रामीणों ने बताया कि जल संसाधन विभाग के ईई मरकाम भी निरीक्षण के लिए पहुंचे थे। ग्रामीणों के अनुसार निरीक्षण के दौरान उन्होंने पूरी परत को खोदकर तकनीकी मानकों के अनुसार पुनः काली मिट्टी डालने के निर्देश दिए थे, ताकि सरोवर में पानी रुक सके और योजना का उद्देश्य पूरा हो सके। लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारी के लौटते ही निर्देशों का पालन करने के बजाय फिर से पुराने तरीके से लीपापोती कर कार्य शुरू कर दिया गया।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरोवर का निर्माण पूरी तरह तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं किया गया तो बारिश का पानी लंबे समय तक नहीं टिक पाएगा और शासन की लाखों रुपये की राशि खर्च होने के बावजूद किसानों और ग्रामीणों को अपेक्षित लाभ नहीं मिलेगा। ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे निर्माण कार्य की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए, जिम्मेदार अधिकारियों और एजेंसी की भूमिका की जांच हो तथा गुणवत्ता संबंधी सभी निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि जांच रिपोर्ट, सुधार कार्य और भुगतान प्रक्रिया को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि अमृत सरोवर का निर्माण वास्तव में निर्धारित मानकों के अनुरूप हुआ है या नहीं।




