वन विभाग को भूमि आवंटन पर विवाद, जयस ने लगाए अदालत की अवमानना के आरोप।
न्यायालय की दहलीज पर पहुंचा डूडा बोरगांव भूमि विवाद, जयस ने दी चेतावनी।

बैतूल। भूमिहीन और आवासहीन आदिवासी परिवारों को भूमि अधिकार दिलाने के बजाय बेदखल किए जाने के आरोप लगाते हुए जय आदिवासी युवा शक्ति (जयस) ने राजस्व एवं वन विभाग के अधिकारियों पर गंभीर लापरवाही और नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए मामले को उच्च न्यायालय तक ले जाने की घोषणा की है।
जयस के नर्मदापुरम् संभाग एवं बैतूल जिला अध्यक्ष संदीप कुमार धुर्वे ने जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा कि बैतूल जिले में राजस्व और वन विभाग के अधिकारियों की गंभीर लापरवाही के कारण गांव-गांव में शासकीय भूमि विवाद उत्पन्न हो गए हैं। उनका आरोप है कि भूमिहीन एवं आवासहीन लोगों को भूमि अधिकार देने के बजाय ऐसे परिवारों को भी बेदखल किया जा रहा है जो पिछले 50 वर्षों से संबंधित भूमि पर काबिज हैं।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार ग्राम डूडा बोरगांव की भूमि मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 के अध्याय-18 में वर्णित दखल रहित भूमि की श्रेणी में आती है। धारा 237(1) के तहत सार्वजनिक प्रयोजन के लिए आरक्षित इस भूमि को राजस्व विभाग ने निस्तार पत्रक में छोटे झाड़ के जंगल मद में दर्ज किया था। जयस का आरोप है कि इसी भूमि पर लंबे समय से निवास और कब्जा रखने वाले आठ आदिवासी परिवारों को प्रशासन ने बेदखल कर दिया तथा भूमि को वृक्षारोपण के लिए वन विभाग को पुनः आवंटित कर दिया।
जयस ने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले भी ग्राम की बड़े झाड़ और छोटे झाड़ के जंगल मद में दर्ज भूमि को वन विभाग ने 1 अगस्त 1958 की अधिसूचना के आधार पर संरक्षित वन भूमि बताते हुए सर्वे और डिमार्केशन में शामिल कर लिया था। संगठन का कहना है कि तात्कालिक कलेक्टर ने दखल रहित भूमि को पुनः दखल रहित भूमि घोषित करते हुए भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 237(3) का उल्लंघन किया और उक्त भूमि वन विभाग को वृक्षारोपण के लिए आवंटित कर दी।
जयस ने दक्षिण वनमंडल बैतूल पर भी आरोप लगाया है कि कोदारोटी में बन रहे जलाशय की डूब में आई बड़े झाड़ और छोटे झाड़ के जंगल मद की भूमि के बदले छोटे झाड़ मद की दुगनी भूमि वैकल्पिक वृक्षारोपण के लिए प्राप्त की गई, जो सर्वोच्च न्यायालय में सिविल याचिका क्रमांक 202/95 में दिए गए आदेशों के विपरीत है। संगठन का दावा है कि यह सर्वोच्च न्यायालय के आदेश की अवमानना का मामला है और ऐसी ही अवमानना कलेक्टर स्तर पर भी की गई है।
जय आदिवासी युवा शक्ति ने कहा है कि भूमिहीन आदिवासियों को बेदखल करने और कथित न्यायालय अवमानना से जुड़े इस पूरे प्रकरण को लेकर उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका दायर करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। संगठन ने दावा किया है कि वह प्रभावित आदिवासी परिवारों को न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेगा। प्रेस विज्ञप्ति संगठन के महेश उइके द्वारा जारी की गई।




