अनुमति के अभाव में 2 किमी सड़क निर्माण कार्य अटका।
एक ट्रांसफार्मर से सिंचाई और गांव की सप्लाई, किसानों को नुकसान। सरपंच मालती जयप्रकाश कासदेकर ने कलेक्टर से की बिजली और सड़क समस्या के समाधान की मांग ।

बैतूल। धायवानी सरपंच मालती कासदेकर एवं आठनेर जनपद क्षेत्र क्रमांक-8 की जनपद सदस्य सुमिता उइके ने कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी को ज्ञापन सौंपकर ग्राम पंचायत धायवानी अंतर्गत ग्राम बाबजई की बिजली और सड़क संबंधी समस्याओं के शीघ्र समाधान की मांग की है। उन्होंने बताया कि बाबजई से धायवानी तक की मुख्य बिजली लाइन पूरी तरह जर्जर हो चुकी है तथा कई बिजली पोल खराब हालत में हैं। आगामी बारिश के मौसम में इससे बड़ा हादसा होने की आशंका बनी हुई है।
ज्ञापन में बताया गया है कि ग्राम बाबजई में लगभग चार वर्ष पूर्व केबलिंग का कार्य किया गया था, लेकिन इसके बावजूद बिजली संबंधी समस्याएं लगातार बनी हुई हैं। ग्रामीणों द्वारा कई बार बिजली कंपनी को शिकायत के बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। वर्तमान में गांव की घरेलू बिजली आपूर्ति और किसानों की सिंचाई के लिए एक ही ट्रांसफार्मर से बिजली दी जा रही है, जिससे किसानों को फसलों की सिंचाई में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है और हर वर्ष भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।
सुमिता उइके जनपद सदस्य ने सड़क निर्माण की समस्या भी उठाई है। उन्होंने बताया कि बाबजई से धायवानी तक 5 किलोमीटर लंबी पीडब्ल्यूडी सड़क का निर्माण कार्य पिछले दो वर्षों से चल रहा है। इसमें 3 किलोमीटर सड़क का निर्माण राजस्व भूमि पर पूरा हो चुका है, जबकि 2 किलोमीटर हिस्सा वन क्षेत्र में होने के कारण वन विभाग से अनुमति नहीं मिलने से निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है।
जनपद सदस्य ने कलेक्टर से मांग की है कि ग्राम बाबजई के लिए अलग ट्रांसफार्मर स्वीकृत किया जाए, जर्जर बिजली पोल और केबलों की मरम्मत कराई जाए तथा वन क्षेत्र में लंबित सड़क निर्माण के लिए आवश्यक अनुमति दिलाकर कार्य जल्द पूरा कराया जाए।

जामवन्त सिंह कुमरे जयस प्रदेश संयोजक ने कहा आदिवासी अंचल के दूरस्थ ग्रामो में अधिकतर प्रशासन अनदेखी करता है, सावलमेंढा के अंतर्गत आने वाले ग्राम बाबजेई, धायवानी में बिजली विभाग की लापरवाही बर्दाश्त नही की जावेगी जल्द से जल्द उपरोक्त मागो पर कार्यवाही और मरम्मत कार्य कर नई बिजली केबल नही लगाई गई तो आंदोलन करने मजबूर होना पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होंगी।




