पाल धनगर समाज ने मनाई लोकमाता अहिल्यादेवी की 301वीं जयंती।

मेधावी विद्यार्थियों और प्रतिभाओं का शील्ड व प्रमाण पत्र देकर किया सम्मान।

बैतूल। जिला पाल धनगर समाज बैतूल द्वारा पुण्यश्लोक लोकमाता अहिल्यादेवी होलकर की 301वीं जयंती स्थानीय पाल भवन में मनाई गई। कार्यक्रम में कक्षा 10वीं और 12वीं की वर्ष 2025-26 की बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्र-छात्राओं के साथ समाज की अन्य प्रतिभाओं को शील्ड व प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का शुभारंभ जिला पाल धनगर समाज के अध्यक्ष चिंधुलाल पाल द्वारा लोकमाता अहिल्यादेवी के छायाचित्र पर दीप प्रज्वलन और माल्यार्पण के साथ किया गया। इस दौरान उपाध्यक्ष चैन सिंह सागरे, रामदयाल पाल, सचिव शिवकिशोर पाल, पूर्व सचिव एवं वरिष्ठ पत्रकार कामरेड कुंदन राजपाल, कोषाध्यक्ष जयदयाल पाल, महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष प्रमिला मोरे, रामकलीबाई पाल, घुमंतू एवं अर्धघुमंतू प्रकोष्ठ के प्रदेश उपाध्यक्ष उदय पाल, जिला अध्यक्ष राजेश पाल सहित बड़ी संख्या में समाजजन एवं महिलाएं उपस्थित रहीं। अतिथियों का पुष्पमालाओं से स्वागत भी किया गया।

सम्मान समारोह में कक्षा 12वीं से रिया पाल 85 प्रतिशत, शेखर पाल 83 प्रतिशत और सूरज पाल 82 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर सम्मानित हुए। वहीं कक्षा 10वीं में ऋषभ चंदेल 96 प्रतिशत, वंश सागरे, वेदांशी पाल 87 प्रतिशत, राशि पाल, प्राची पाल 85 प्रतिशत, वंशिका पाल 85 प्रतिशत, तनिष्का पाल 84 प्रतिशत तथा भुवन पाल 75 प्रतिशत अंक प्राप्त करने पर सम्मानित किए गए। इसके अलावा टिकारी निवासी सुखनंदन मोरे की पुत्री डॉ. वर्षा मोरे को कृषि विषय में पीएचडी प्राप्त करने तथा राजकुमार पाल के पुत्र अतुल पाल को राज्य स्तरीय शतरंज प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए सम्मानित किया गया। उल्लेखनीय है कि अतुल पाल को पूर्व में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी सम्मानित कर चुके हैं।

जयंती समारोह में अध्यक्ष चिंधुलाल पाल, उपाध्यक्ष चैन सिंह सागरे, रामदयाल पाल, सचिव शिवकिशोर पाल, महिला प्रकोष्ठ अध्यक्ष प्रमिला मोरे और कामरेड कुंदनराज पाल सहित वक्ताओं ने लोकमाता अहिल्यादेवी के आदर्शों, समाजसेवा और जनकल्याणकारी कार्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने महिलाओं और समाजजनों से उनके आदर्शों को जीवन में अपनाने तथा समाज के उत्थान के लिए संगठित होकर कार्य करने का आह्वान किया। कार्यक्रम का संचालन दरबारीलाल पाल ने किया।

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