“त्याग, तक़वा और भाईचारे का पैग़ाम, ईद-उल-अज़हा, “मुबारक” मुमताज शेख” ।
"कुर्बानी मांस की नहीं, नीयत की है - अल्लाह दिल का तक़वा देखता है" "सतपुड़ा की वादियों से उठा इंसानियत का पैग़ाम, मुमताज शेख ने दी देश को मुबारकबाद"

“सारणी:” नवतपा की जलती-तपती धूप और सतपुड़ा की हरी-भरी वादियों के बीच बसी कोल नगरी पाथाखेड़ा से इस बार ईद-उल-अज़हा का पैग़ाम कुछ अलग अंदाज़ में आया। नवनिर्माण बहुउद्देशीय संस्था पाथाखेड़ा की अध्यक्षा एवं समाज सेविका श्रीमती मुमताज शेख ने समस्त देशवासियों को बकरीद की मुबारकबाद देते हुए कहा – “अल्लाह सिर्फ इंसान के दिल की नीयत ‘तक़वा’ और उसके आज्ञा पालन को देखता है, खून या गोश्त को नहीं।”
“ईद का मतलब – बलिदान का जश्न, अहंकार का अंत”
मुमताज शेख ने बताया कि अरबी में ‘ईद’ का मतलब ‘त्योहार’ और ‘अज़हा’ का मतलब ‘कुर्बानी’ या ‘बलिदान’ होता है। इसलिए इसे ‘बलिदान का पर्व’ भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि दुनिया भर के मुसलमान हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम के उस महान समर्पण की याद में कुर्बानी देते हैं, जब उन्होंने अल्लाह के हुक्म पर अपने जिगर के टुकड़े हज़रत इस्माइल को कुर्बान करने के लिए पेश कर दिया था।
“पैग़ंबर मुहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का फरमान”
मुमताज शेख ने हदीस का हवाला देते हुए कहा कि “कुर्बानी का असली महत्व मांस या खून बहाना नहीं, बल्कि अल्लाह के आदेश का बिना किसी सवाल के पालन करना है।” पैग़ंबर साहब ने ताकीद की है कि जो व्यक्ति आर्थिक रूप से सक्षम होने के बावजूद कुर्बानी नहीं करता, उसे ईदगाह के करीब भी नहीं आना चाहिए।
“तीन हिस्से – इंसानियत का सबसे खूबसूरत हिसाब”
समाज सेविका मुमताज शेख ने कुर्बानी के गोश्त के बंटवारे को “मानवता हित का सबसे सरल फार्मूला” बताया।
“पहला हिस्सा – अपने परिवार के लिए”
“दूसरा हिस्सा – रिश्तेदारों और पड़ोसियों के लिए”
“तीसरा हिस्सा – गरीबों, यतीमों और जरूरतमंदों के लिए”
“यह बंटवारा समाज में भाईचारा, बराबरी और मोहब्बत को बढ़ाता है। भूखे को खाना खिलाना सबसे बड़ी इबादत है।”
“हज़रत इब्राहिम का सबक – आज के दौर के लिए”
मुमताज शेख ने कहा कि हज़रत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की ज़िंदगी “अटूट विश्वास, सर्वोच्च बलिदान और ईश्वर के प्रति पूर्ण समर्पण” का प्रतीक है। नमरूद की दहकती आग में कूदना हो, मक्का के तपते रेगिस्तान में बीवी-बच्चे को छोड़ना हो, या बेटे की कुर्बानी का हुक्म – हर इम्तिहान में वे पास हुए।
“आज हमें भी अपने अंदर के अहंकार, नफरत, लालच और स्वार्थ की कुर्बानी देनी चाहिए। यही बकरीद का असल पैग़ाम है।”
“हज की समाप्ति और इंसानियत की जीत”
उन्होंने बताया कि ईद-उल-अज़हा हज यात्रा की समाप्ति का भी प्रतीक है। अल्लाह ने हज़रत इब्राहिम की अटूट आस्था देखकर उनके बेटे की जगह जन्नत से एक दुंबा भेजकर कुर्बानी कुबूल की थी। “यह हमें सिखाता है कि अल्लाह रहमदिल है, वो सिर्फ हमारी नीयत देखता है।”
“पाथाखेड़ा से देश के नाम पैग़ाम”
नवनिर्माण बहुउद्देशीय संस्था परिवार की ओर से श्रीमती मुमताज शेख ने कहा – “यह त्योहार त्याग, आज्ञाकारिता और गरीबों की मदद का प्रतीक है। आइए, इस बकरीद पर हम अहंकार की कुर्बानी दें, भूखे को खाना खिलाएं, और देश में अमन-चैन, भाईचारे की फिज़ा कायम करें।”
उन्होंने नवतपा की गर्मी में भी सतपुड़ा की वादियों से समस्त देश-प्रदेशवासियों को ईद-उल-अज़हा की दिली मुबारकबाद, हार्दिक बधाई और ढेर सारी शुभकामनाएं प्रेषित कीं।
“न तक़वा बिना कुर्बानी कुबूल, न इंसानियत बिना ईद मुकम्मल”
“ईद मुबारक” देश की संस्कृति को संज्ञान में रख ,कुर्बानी, जनहित में भाईचारा, मानवता हित में मोहब्बत।”




