बीजादेही थाना में पदस्थ पुलिसकर्मियों पर नशे में अभद्रता के गंभीर आरोप, एसपी से शिकायत ।

पीड़ित सेवादल ब्लॉक अध्यक्ष गोलू सोनी के साथ शिकायत करने पहुंचे एसपी कार्यालय।

बैतूल। बीजादेही थाना क्षेत्र में तेंदूपत्ता कार्य से जुड़े मजदूरों और दो महिला मकान मालिकों ने थाना प्रभारी एवं मुंशी पर मारपीट, अभद्रता, धमकी और प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं।

पीड़ित मदद के लिए सेवादल ब्लॉक अध्यक्ष गोलू सोनी के पास पहुंचे, जिसके बाद एसपी से शिकायत कर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग की गई है।

 गोलू सोनी ने कहा कि केवल पानी लेने जैसी सामान्य बात पर किसी मजदूर के साथ अभद्रता और मारपीट किया जाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि कानून व्यवस्था संभालने वालों से संवेदनशील व्यवहार की अपेक्षा की जाती है, न कि भय और प्रताड़ना का माहौल बनाने की।

आवेदन के अनुसार बालाघाट जिले के आरम्बाघोटी निवासी प्यारेलाल बायसवर और राजकुमार पांचे बीजादेही क्षेत्र में तेंदूपत्ता कार्य के सिलसिले में आए हुए थे और ग्राम बीजादेही निवासी शांताबाई एवं सरिता यादव के घर किराये से रह रहे थे। शिकायत में बताया गया कि 17 मई की रात करीब 9 बजे दोनों मजदूर पानी लेने के लिए हैंडपंप पर गए थे। वहां पानी खराब होने की जानकारी मिलने पर उन्हें थाना परिसर में लगे फ्रिज से पानी लेने के लिए कहा गया।

 

आरोप है कि जब दोनों थाना परिसर में पानी लेने पहुंचे तो थाना प्रभारी और मुंशी ने उनसे पूछताछ करते हुए गाली-गलौज शुरू कर दी। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि उन्हें मां-बहन की अशोभनीय गालियां दी गईं और प्यारेलाल के बाएं हाथ पर मारपीट भी की गई। आवेदन में कहा गया है कि जब उन्होंने बताया कि वे शांताबाई और सरिता के घर किराये से रह रहे हैं, तब दोनों महिलाओं के लिए भी अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया गया।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि दोनों मजदूरों को देर रात तक थाने में बैठाकर रखा गया और आधार कार्ड दिखाने के बाद करीब 11 बजे छोड़ा गया। आवेदकों ने आरोप लगाया कि उस दौरान थाना प्रभारी और मुंशी नशे की हालत में थे।

 

महिला आवेदकों शांताबाई और सरिता ने भी आवेदन में आरोप लगाया है कि पुलिसकर्मी देर रात उनके घर पहुंचकर या अन्य पुलिसकर्मियों को भेजकर उन्हें परेशान करते हैं तथा अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते हैं। महिलाओं ने यह भी आरोप लगाया कि उनके बेटे को झूठे मामलों में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी गई।

पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने मामले की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए बीजादेही थाने में संपर्क किया, लेकिन पहले राज्यपाल के दौरे का हवाला देकर मामला टाल दिया गया और बाद में भी शिकायत दर्ज नहीं की गई। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि शिकायतकर्ताओं को गाली-गलौज कर थाने से भगा दिया गया।

आवेदकों ने पुलिस अधीक्षक से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करने तथा भविष्य में किसी अप्रिय घटना से सुरक्षा दिलाने की मांग की है। फिलहाल मामले में पुलिस विभाग की ओर से आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

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