बैतूल के जंगलों में सांपों की अनोखी दुनिया, 5 फैमिली की 19 प्रजातियां दर्ज।

पूर्व प्राध्यापक डॉ. सुखदेव डोंगरे ने तैयार किया बैतूल जिले का स्नेक फाना। किसान के मित्र हैं कई सांप, बिना कारण न मारने की अपील। वन विभाग और स्नेक मित्रों के सहयोग से सामने आई बैतूल की सर्प विविधता।

बैतूल। सतपुड़ा अंचल की जैव विविधता एक बार फिर चर्चा में है। बैतूल जिले में सांपों की विभिन्न प्रजातियों पर किए गए विस्तृत अध्ययन में जिले में 5 फैमिली और 19 प्रजातियों के सांपों की मौजूदगी दर्ज की गई है। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस जयवंती हाक्सर शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैतूल के पूर्व प्राध्यापक डॉ. सुखदेव डोंगरे ने वन विभाग और स्नेक मित्रों के सहयोग से वर्ष 2024-25 में बैतूल जिले का स्नेक फाना तैयार किया है। अध्ययन में यह भी सामने आया कि जिले के वन क्षेत्रों के साथ-साथ शहरी और ग्रामीण इलाकों में भी सांपों की विविध प्रजातियां निवास कर रही हैं।

– सतपुड़ा अंचल में सर्पों पर बड़ा अध्ययन

क्षेत्रीय प्राकृतिक विज्ञान संग्रहालय भोपाल, पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा प्रकाशित पुस्तक – सांप हमारे दुश्मन नहीं- के अनुसार विश्व में लगभग 2700 प्रजातियों के सांप पाए जाते हैं। वर्ष 2005 की रिपोर्ट में मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में 6 फैमिली एवं 39 प्रजातियों के सांप दर्ज किए गए थे। वहीं वर्ष 2010 से 2012 के अध्ययन में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और पचमढ़ी बायोस्फीयर रिजर्व क्षेत्र में 6 फैमिली एवं 31 प्रजातियों के सांप पाए गए। अमोल कुमार के वर्ष 2012 के अध्ययन में सतपुड़ा टाइगर रिजर्व होशंगाबाद में 22 प्रजातियां रिकॉर्ड की गईं, जबकि संदीप फेलोबस ने वर्ष 2014 में पचमढ़ी बायोस्फीयर रिजर्व में 31 प्रजातियों का उल्लेख किया। शैला इशाक के अध्ययन में गांधीसागर वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में 6 फैमिली की 22 प्रजातियां दर्ज की गई थीं।

– वन विभाग और स्नेक मित्रों का सहयोग

डॉ. सुखदेव डोंगरे ने वन विभाग के रेंजर बरडे, स्नेक मित्र आदिल खान, विशाल विश्वकर्मा और जमाल भाई के सहयोग से बैतूल जिले में यह अध्ययन किया। अध्ययन के दौरान बैतूल, आमला, घोड़ाडोंगरी, आठनेर, भैंसदेही, शाहपुर, पट्टन, चिचोली, भीमपुर और मुलताई सहित जिले के दस विकासखंडों के वन क्षेत्रों, सतपुड़ा टाइगर रिजर्व और मेलघाट क्षेत्र में सांपों की प्रजातियों का सर्वे किया गया।

– इन प्रजातियों की हुई पहचान

अध्ययन में बोइडी फैमिली के रेड सेंड बोआ, कॉमन सेंड बोआ और अजगर, कोलूब्रिडी फैमिली के सीता कील बैक, कॉमन कैट स्नेक, ब्रॉन्ज बैक ट्री स्नेक, कॉमन ट्रिंकेट स्नेक, वुल्फ स्नेक, ग्रीन कील बैक, कॉमन कुकरी स्नेक, रसेल कुकरी स्नेक, रेट स्नेक और चेकरड कील बैक दर्ज किए गए। वहीं इलापीडी फैमिली में कॉमन करैत और इंडियन स्पेक्टेकल्ड कोबरा, टाइफ्लोपिडी फैमिली में ब्राह्मणी वर्म स्नेक तथा वाइपरीडी फैमिली में सॉ स्केल्ड वाइपर, बम्बू पिट वाइपर और रसेल्स वाइपर की मौजूदगी रिकॉर्ड की गई।

– सांप पर्यावरण संतुलन के लिए जरूरी

डॉ. डोंगरे ने बताया कि सभी सांप जहरीले नहीं होते और बिना कारण उन्हें नहीं मारना चाहिए। धामन जैसे सांप बड़ी मात्रा में चूहे खाकर किसानों को फायदा पहुंचाते हैं। इसके साथ ही कई प्रजातियां कीड़े-मकोड़ों को खाकर पर्यावरण संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने लोगों से जागरूकता बढ़ाने और सांपों के संरक्षण की अपील की है।

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