आठनेर में देवी महापुराण कथा के सप्तम दिवस शिव विवाह प्रसंग का हुआ वर्णन।
कथा वाचक नित्या किशोरी ने दहेज प्रथा का विरोध कर योग्य वर चयन का दिया संदेश। गणेश जन्म और रिद्धि-सिद्धि विवाह की सुंदर झांकी ने श्रद्धालुओं को किया भावविभोर।

बैतूल। आठनेर के विकास नगर में आयोजित देवी महापुराण कथा के सप्तम दिवस वृंदावन से पधारी कथा वाचक नित्या किशोरी जी ने शिवजी के विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि विवाह में हमेशा योग्य वर का चयन करना चाहिए तथा दहेज प्रथा जैसी कुप्रथा का विरोध करना चाहिए।
उन्होंने धनु भगत की कथा सुनाते हुए बताया कि जिस घर में मां भगवती की ज्योति जलती है, वहां जीवन में कभी अंधकार नहीं रहता। कथा में उन्होंने अकबर का प्रसंग सुनाते हुए बताया कि वह स्वयं को बहुत बड़ा मानता था। उसने धनु भगत की परीक्षा लेते हुए मां के दरबार में घोड़े का कटा सिर जोड़ने की चुनौती दी। धनु भगत ने मां से प्रार्थना की कि उनकी लाज रखना या डुबाना अब मां के हाथ में है। मां की कृपा से घोड़े का सिर तुरंत जुड़ गया।
नित्या किशोरी जी ने कहा कि पुरुषोत्तम मास में कान्हा जी सहित सभी देवी-देवताओं की सूर्योदय से पूर्व पूजा करने से विशेष फल प्राप्त होता है। उन्होंने आगे गणेश जी के जन्म की कथा सुनाई और रिद्धि-सिद्धि से उनके विवाह की सुंदर झांकी प्रस्तुत की, जिससे श्रद्धालु भावविभोर हो उठे।
कथा आयोजन में महिला मंडल ग्रुप कान्हा की मुरली की सदस्य दीपा साहू, कविता पांडे, लक्ष्मी पटैया, मनीषा सोनी, कंचन मालवी, गीता कदम, रिंकी पानकर, रिंकी सूर्यवंशी, मोहिनी मालवी, सुशीला गलफट, मंदा खाड़े, सुनीता डोंगरे और रीना आजाद ने सक्रिय भूमिका निभाई।




