आदिवासी समाज सम्मेलन में चिटकोरा डंडार सुसुन ने दिखाई संस्कृति की असली पहचान।
शाहपुर ब्लॉक के ग्राम धारनमऊ में आयोजित हुआ दो दिवसीय आदिवासी समाज का सम्मेलन। जंगल सत्याग्रह के महानायकों को किया नमन। नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का दिया संदेश।

बैतूल। आदिवासी अंचल बैतूल जिले में यहां की संस्कृति अपने आप में एक अलग पहचान रखती है, जहां कोरकू समाज की परंपराएं आज भी जीवन का अभिन्न हिस्सा बनी हुई हैं। इन्हीं परंपराओं की जीवंत झलक उस वक्त देखने को मिली जब सांस्कृतिक कार्यक्रमों में चिटकोरा डंडार और सुसुन की गूंज ने पूरे माहौल को आदिवासी अस्मिता और गौरव से भर दिया, मानो सदियों पुरानी विरासत एक साथ सजीव हो उठी हो।
उल्लेखनीय है कि धारनमऊ में आदिवासी समाज का ऐतिहासिक सम्मेलन का आयोजन एक सांस्कृतिक महाकुंभ के रूप में संपन्न हुआ। 2 मई से 3 मई तक चले इस आयोजन में आदिवासी समाज की परंपराओं, रीति-नीति, वेशभूषा और मातृभाषा को सहेजने का सामूहिक संकल्प देखने को मिला। कार्यक्रम में जंगल सत्याग्रह के महानायकों को नमन करते हुए उनकी स्मृति को जीवंत रखा गया, वहीं नई पीढ़ी को अपनी जड़ों से जोड़ने का संदेश दिया गया।
– पूर्वजों की विरासत को किया नमन
सम्मेलन की शुरुआत 2 मई की सुबह 8 बजे क्रांतिकारियों के माल्यार्पण से हुई, इसके बाद उनके परिजनों का सम्मान किया गया। मुख्य अतिथियों एवं समाज के प्रमुख कार्यकर्ताओं ने अपने उद्बोधन में आदिवासी संस्कृति की विशिष्टता और उसे संरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम में जन्म से मृत्यु तक के संस्कार, विवाह रीति-नीति, मुठवा पूजन, खोटा पूजन, माहो पूजन जैसे पारंपरिक अनुष्ठानों की महत्ता को विस्तार से समझाया गया।
– सांस्कृतिक रंग में रंगा मंच, चिटकोरा डंडार और सुसुन ने बांधा समां
सम्मेलन का सबसे आकर्षक केंद्र सांस्कृतिक कार्यक्रम रहे, जिसमें चिटकोरा डंडार, सुसुन और पारंपरिक वेशभूषा में प्रस्तुतियों ने लोगों का मन मोह लिया। रामदीन बैठे जिला नर्मदापुरम, सरिता कास्दे ब्लॉक शाहपुर, सविता अखण्डे सरपंच घोघरी सारनी और रामशंकर काजले सहित अनेक कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से आदिवासी लोक संस्कृति की जीवंत झलक पेश की। भोजन और प्रसादी की पारंपरिक व्यवस्था ने आयोजन को पूर्णता प्रदान की।
सम्मेलन में प्रतिभाशाली युवक-युवतियों और वरिष्ठजनों का सम्मान कर उन्हें प्रोत्साहित किया गया। समाज में शिक्षा के प्रति जागरूकता और अपनी मूल पहचान को बचाने का संदेश भी प्रमुखता से दिया गया।
– जनप्रतिनिधियों और समाज के अग्रणी लोगों की रही उपस्थिति
कार्यक्रम में झामसिंह बारस्कर कार्यपालन लोक निर्माण अधिकारी बैतूल, संदीप बारस्कर आदिवासी ब्लॉक अध्यक्ष शाहपुर, बंशीलाल शैलूकर, भुरेलाल चौहान जनपद सदस्य, बिसराम काजले उपसरपंच ढोडरामऊ, रंजित कलमें सरपंच टिमरनी, रामेश्वर अखण्डे सरपंच ढोडरामऊ, सुनील कास्दे सचिव खरवार, तुलाराम कास्दे सरपंच धनवार, मधु यादव सचिव खापा, मालती उईके सरपंच खापा, रामप्रसाद काजले सरपंच झापडी, रामशंकर काजले गायक, विरेंद्र प्रताप बारस्कर सरपंच सालीमेट, श्रीमती तुलसा बाई जनपद सदस्य, पिंकेश कलमें ब्लॉक मंत्री कांजीतालाव, अशोक कलमें जनपद सदस्य बल्लौर, श्रीराम दरश्यामकर सरपंच मोखामाल, अशोक अमित शैलूकर, रमेश, सुरेश, गोविंद, संतोष, राजकुमार बारस्कर, राजेन्द्र, गुलशन नारके, गोपाल बारस्कर, रामचरन बारस्कर, राधेश्याम, प्रेमलाल, खुशीलाल, भुरा, शैलेश, रामकेश, रामकिशोर, ओम यादव खापा, संजू यादव झापडी, नितेश यादव झापडी, रुपलाल यादव उपब्लाक अध्यक्ष भौरा, जगदीश यादव कछार, नेहरू मवासे सरपंच कछार, भुता, गुलाब, लालसिंह, मुनीम, रामभरोस, गटटू, पुन्नी, तुलसीराम गायक, कमलेश काजले गायक रामापूरा, पूनमसिंह कलमें गायक रामापूरा, डॉ साहब टिमरनी, सुनील मवासे कोठा, कैलाश शिक्षक कोठा, किसनलाल बारस्कर भूतपूर्व सरपंच खापा, श्रीमती विलकिस बारस्कर जिला सदस्य, श्रीमती सुन्दरिया बाई महिला ब्लॉक अध्यक्ष शाहपुर सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।




