डॉक्टरों की अपठनीय लिखावट के खिलाफ सीएमएचओ और आईएमए अध्यक्ष को सौंपा ज्ञापन।
जिला औषधि विक्रेता संघ ने मरीजों के अधिकार के लिए उठाई आवाज। कैपिटल लेटर, जेनेरिक नाम और डिजिटल पर्ची को बढ़ावा देने की मांग । कंप्यूटराइज्ड प्रिस्क्रिप्शन लिखने वाले डॉक्टर सम्मानित।

बैतूल। बैतूल में मरीजों के हित से जुड़ा एक महत्वपूर्ण मुद्दा अब प्रमुखता से सामने आया है, जहां जिला औषधि विक्रेता कल्याण संघ ने डॉक्टरों की अपठनीय लिखावट के खिलाफ पहल करते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी मनोज हुरमाड़े और आईएमए अध्यक्ष डॉ पांडेय को ज्ञापन सौंपा। इस पहल का आधार हाल ही में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट का वह ऐतिहासिक फैसला बना है, जिसमें सुपाठ्य मेडिकल पर्ची को मरीज का मौलिक अधिकार बताया गया है।
संघ के अध्यक्ष मनजीत सिंह साहनी, सचिव सुनील सलूजा और कोषाध्यक्ष जयदेव गायकी के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि जिले में कई चिकित्सकों द्वारा लिखे गए प्रिस्क्रिप्शन स्पष्ट रूप से पढ़ने योग्य नहीं होते, जिससे दवाओं की पहचान में कठिनाई होती है और गलती की आशंका बनी रहती है। यह स्थिति सीधे तौर पर मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा करती है। ज्ञापन में कहा गया कि आज के समय में मरीज जागरूक हैं और उन्हें अपनी दवाओं और इलाज की पूरी जानकारी समझने का अधिकार है।
संघ ने मांग रखी कि जिले के सभी चिकित्सकों को निर्देशित किया जाए कि वे दवाओं के नाम कैपिटल लेटर में स्पष्ट लिखें, जेनेरिक नाम अनिवार्य रूप से अंकित करें, दवा की मात्रा, सेवन का समय और अवधि स्पष्ट रूप से लिखें, ताकि मरीज स्वयं पर्ची पढ़ और समझ सके। साथ ही कंप्यूटराइज्ड या टाइप्ड प्रिस्क्रिप्शन को अनिवार्य या प्रोत्साहित किया जाए और जरूरत पड़ने पर उसकी डिजिटल कॉपी भी उपलब्ध कराई जाए।
ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि इंडियन मेडिकल काउंसिल के नियमों, नेशनल मेडिकल कमीशन के दिशा-निर्देशों और विभिन्न न्यायालयों के आदेशों के अनुसार स्पष्ट और सुपाठ्य प्रिस्क्रिप्शन देना चिकित्सकों की जिम्मेदारी है। पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने भी इसे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा माना है।
इसी जनहित अभियान के तहत जिला औषधि विक्रेता कल्याण संघ ने उन चिकित्सकों का सम्मान भी किया जो कंप्यूटराइज्ड प्रिस्क्रिप्शन लिख रहे हैं। संघ ने इसे सकारात्मक पहल बताते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों से मरीजों की सुरक्षा बढ़ेगी, स्वास्थ्य व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वास भी मजबूत होगा। इस अवसर पर संजय अड़लक, केदारनाथ देशमुख, योगेश रघुवंशी, माधव राव खोबरे, नवनीत मालवीय, नवीन वागद्रे, रितेश कनाठे, यशवंत डोंगरे, आनंद कुमार चौरे, कमलेश खाकरे उपस्थित थे।




