ऊर्जा और कोल क्षेत्र के श्रमिक आर्थिक शोषण के शिकार।
सारनी-पाथाखेड़ा में मजदूरों को नहीं मिल रहा तय वेतन। ठेकेदारों पर मजदूरी में कटौती के आरोप। मानवाधिकार संगठन ने कलेक्टर से की हस्तक्षेप की मांग।

बैतूल। सारनी-पाथाखेड़ा क्षेत्र में कार्यरत मजदूरों को निर्धारित मजदूरी नहीं मिलने का मामला सामने आया है। अंतर्राष्ट्रीय मानवाधिकार सुरक्षा संगठन के जिलाध्यक्ष सतीश कुमार बौरासी एवं महिला जिला अध्यक्ष दीपिका बौरासी ने कलेक्टर बैतूल को ज्ञापन सौंपकर श्रमिकों के साथ हो रही वेतन विसंगतियों की ओर ध्यान आकर्षित कराया है। संगठन ने बताया कि यह क्षेत्र देशभर में ऊर्जा और कोल उत्पादन के लिए जाना जाता है, जहां विभिन्न कंपनियों और ठेकेदारों के माध्यम से बड़े स्तर पर कार्य कराए जाते हैं।
ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि यहां कार्यरत मजदूरों को भारत सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी का पूरा भुगतान नहीं किया जा रहा है। मजदूरों को कम दरों पर काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे उनके परिवार के भरण-पोषण पर भी असर पड़ रहा है। संगठन के अनुसार यह स्थिति श्रमिकों के साथ आर्थिक शोषण के समान है, जहां सरकारी मानकों को दरकिनार कर मजदूरी में कटौती की जा रही है।
संगठन ने कलेक्टर से मांग की है कि मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच कराई जाए और दोषी कंपनियों व ठेकेदारों पर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। साथ ही मजदूरों को उनका उचित हक दिलाने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएं। संगठन ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन इस दिशा में सकारात्मक पहल करेगा और श्रमिकों को न्याय मिलेगा। ज्ञापन देते समय जिला अध्यक्ष सतीश बौरासी, महिला जिला अध्यक्ष दीपिका बौरासी, महिला जिला उपाध्यक्ष सारिका वरदाहे, जिला संरक्षक रामेश्वर सूर्यवंशी, मनोज तिवारी, जिला उपमंत्री अनिल पाटेकर, तहसील अध्यक्ष राजेश वागद्रे, उत्तम मिस्त्री आदि पदाधिकारी एवं सदस्य उपस्थित रहें।




