वर्ष प्रतिपदा भारत में प्रचलित सभी संवतों का प्रथम दिन है: सुरेंद्र सिंह।
युवाओं को दैनिक शाखा और नैमित्तिक कार्यों से जुड़ने का आह्वान । सह प्रांत प्रचारक ने गिनाए पौराणिक आधार और राष्ट्रीय संदर्भ।

बैतूल। वर्ष प्रतिपदा उत्सव के अवसर पर सह प्रांत प्रचारक मध्य भारत सुरेंद्र सिंह ने अपने बौद्धिक में सनातन परंपरा, इतिहास और वर्तमान राष्ट्रीय परिप्रेक्ष्य को जोड़ते हुए विस्तार से विषय रखा। उन्होंने बताया कि वर्ष प्रतिपदा भारत में प्रचलित सभी संवतों का प्रथम दिन है और पौराणिक मान्यता के अनुसार इसी दिन ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना प्रारंभ की। इसी तिथि को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम का राज्याभिषेक हुआ, युधिष्ठिर का राज्याभिषेक हुआ तथा उज्जैन के सम्राट विक्रमादित्य ने शकों को परास्त कर विक्रम संवत का आरंभ किया।
उन्होंने कहा कि इसी दिन से मां दुर्गा की उपासना के लिए चैत्र नवरात्रि प्रारंभ होती है। सिखों के द्वितीय गुरु गुरु अंगद देव का जन्म दिवस, सिंध प्रांत के संत झूलेलाल जी की जयंती, स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा आर्य समाज की स्थापना तथा शालिवाहन शक संवत का प्रारंभ भी इसी दिन से जुड़ा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक परम पूज्य डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार जी का जन्मदिन भी वर्ष प्रतिपदा पर ही आता है।
सुरेंद्र सिंह ने डॉ केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन परिचय को संक्षिप्त रूप में प्रस्तुत करते हुए उनके राष्ट्रवादी दृष्टिकोण, संगठन निर्माण की क्षमता और विभिन्न प्रसंगों के माध्यम से उनके व्यक्तित्व की प्रेरणादायक झलक दी। उन्होंने अंग्रेजी नव वर्ष और हिंदू नव वर्ष के अंतर को स्पष्ट करते हुए बताया कि भारतीय नव वर्ष प्रकृति, ऋतु परिवर्तन और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा है, जबकि अंग्रेजी नव वर्ष मात्र कालगणना का परिवर्तन है।
उन्होंने उत्सव मनाने की विधियों का उल्लेख करते हुए सभी पंचांगों, हिंदू महीनों, ऋतुओं और दसों दिशाओं के नामों की जानकारी दी। पंच परिवर्तन और वंदे मातरम् के 150 वर्ष पूर्ण होने के महत्व पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने इसे राष्ट्रीय चेतना और स्वाभिमान का प्रतीक बताया। वर्तमान परिस्थितियों में भारत की सशक्त और समर्थ स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने आत्मनिर्भरता, सांस्कृतिक जागरण और वैश्विक मंच पर बढ़ती भूमिका को रेखांकित किया। अंत में उन्होंने युवाओं को नित्य दैनिक शाखा और नैमित्तिक वार्षिक उत्सवों से जुड़ने का आह्वान करते हुए संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय भागीदारी का संदेश दिया।




