जल जीवन मिशन की पंचायतों पर बिजली बिल का बोझ, सरपंचों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन।
पानी सप्लाई पर संकट, पंचायतों के बिजली बिल शासन स्तर से भरने की मांग । आदर्श धनोरा का मामला बना प्रमुख मुद्दा, जल योजना के बिजली बिल पर समाधान की मांग।

बैतूल। भीषण गर्मी के बीच गांवों में पेयजल व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका को लेकर जिला सरपंच संगठन ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर पंचायतों में संचालित नल कनेक्शन के बिजली बिलों की राशि प्रशासनिक स्तर पर जमा कराने की मांग की है। ज्ञापन में बताया गया कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों को पेयजल उपलब्ध कराने के लिए विद्युत कनेक्शन लेकर नल-जल योजना संचालित की जा रही है, लेकिन अधिकांश पंचायतों पर भारी बिजली बिल बकाया हो गया है।
सरपंचों ने बताया कि गांव बड़े होने के कारण पंचायतों द्वारा प्रतिदिन सभी ग्रामीणों को पानी उपलब्ध कराना संभव नहीं है, इसलिए वार्डवार तीन से चार दिन के अंतराल में पानी दिया जाता है। इसी कारण ग्रामीण जल कर की राशि नियमित रूप से जमा नहीं कर रहे हैं, जिससे पंचायतों पर बिजली बिल की बड़ी राशि बकाया हो गई है। बिजली बिल जमा नहीं होने के कारण कई जगह विद्युत कनेक्शन काट दिए गए हैं और लगातार कनेक्शन काटने का प्रयास किया जा रहा है, जिससे गांवों में पेयजल संकट की स्थिति बन रही है।
– बिजली कंपनी ने थमा दिए मनमाने बिल
ज्ञापन में विशेष रूप से ग्राम पंचायत आदर्श धनोरा का मुद्दा उठाते हुए बताया गया कि वहां बिजली कंपनी द्वारा मनमाने तरीके से बिल थमा दिया गया है, जिससे पंचायत पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ आ गया है। सरपंचों का कहना है कि पंचायतों के पास अन्य कोई आय का साधन नहीं है और शासन द्वारा पंचायतों को जो राशि दी गई है, उससे बिजली बिल के भुगतान पर भी रोक लगा दी गई है।
सरपंचों ने कहा कि ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है, लेकिन शासन के सहयोग के बिना यह संभव नहीं हो पा रहा है। बिजली कंपनी द्वारा अधिक राशि के बिल दिए जाने के कारण पंचायतों की बकाया राशि लगातार बढ़ती जा रही है।
जिला सरपंच संगठन ने मुख्यमंत्री से मांग की है कि पंचायतों के बकाया बिजली बिल की राशि का भुगतान शासन स्तर पर तत्काल कराया जाए या फिर पंचायतों को शासन से प्राप्त राशि से बिजली बिल जमा करने की अनुमति दी जाए, ताकि भीषण गर्मी के समय ग्रामीणों को पानी सप्लाई में किसी प्रकार की असुविधा न हो और पेयजल संकट की स्थिति उत्पन्न न हो।




