भयावाड़ी में चयनित आंगनवाड़ी कार्यकर्ता पर अपात्रता का आरोप।

कलेक्टर और महिला बाल विकास अधिकारी से शिकायत। माचना नदी और 20 किलोमीटर का रास्ता, सेवा प्रभावित होने की आशंका ग्रामीणों ने उठाया निष्पक्षता पर सवाल।

 

बैतूल। ग्राम भयावाड़ी में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता चयन को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। इस मामले में ग्रामीणों ने जनपद सदस्य धन्नू उइके के नेतृत्व में कलेक्टर तथा महिला एवं बाल विकास अधिकारी, बैतूल को ज्ञापन सौंपकर चयनित आवेदिका के निवास दावों और पात्रता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों ने इसे चयन प्रक्रिया में गंभीर विसंगति बताते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।

ज्ञापन में ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता के लिए उसी ग्राम का सक्रिय निवासी होना अनिवार्य है, जबकि चयनित आवेदिका का मूल निवास ग्राम डहरगांव बताया गया है। ग्रामीणों के अनुसार उनका पूरा परिवार वर्ष 2018 से डहरगांव में स्वयं के पक्के मकान में स्थायी रूप से निवास कर रहा है और भयावाड़ी में उनका कोई सक्रिय भौतिक निवास नहीं है। इसके बावजूद भयावाड़ी से चयनित किया जाना नियमों के विपरीत बताया गया है।

ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि आवेदिका द्वारा भयावाड़ी का जो राशन कार्ड प्रस्तुत किया गया है वह अत्यंत पुराना है और वर्तमान स्थिति से मेल नहीं खाता। उनका कहना है कि लंबे समय से डहरगांव में निवास करने के बावजूद पुराने राशन कार्ड को आधार बनाकर चयन प्रक्रिया का अनुचित लाभ लिया गया। इसी तरह भयावाड़ी के पते पर बनवाया गया स्थायी निवास प्रमाण पत्र भी भ्रामक और कूट-रचित बताया गया है। ग्रामीणों ने मांग की है कि राजस्व विभाग द्वारा डहरगांव स्थित मकान का भौतिक सत्यापन कराया जाए, जिससे वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि श्रीमती मयूरी भूमरकर की माताजी वर्तमान में भयावाड़ी में आशा कार्यकर्ता के रूप में कार्यरत हैं। उनकी नियुक्ति उस समय हुई थी जब ग्राम में अन्य कोई महिला इस कार्य के लिए इच्छुक नहीं थी। ग्रामीणों का आरोप है कि उस समय की विकल्पहीनता की स्थिति का लाभ उठाकर अब उनकी पुत्री को आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बनाया जाना स्थानीय पात्र महिलाओं के साथ अन्याय है।

ग्रामीणों ने यह भी बताया कि डहरगांव और भयावाड़ी के मध्य माचना नदी पड़ती है। वर्षा ऋतु में नदी में बाढ़ आने पर मार्ग अवरुद्ध हो जाता है और सामान्य 4 से 5 किलोमीटर की दूरी बढ़कर 18 से 20 किलोमीटर हो जाती है। आंगनवाड़ी जैसे संवेदनशील कार्य, जिसमें बच्चों और गर्भवती महिलाओं को प्रतिदिन सेवाएं देनी होती हैं, इतनी दूरी से नियमित रूप से संचालित करना व्यवहारिक नहीं है।

शिकायत करने वालों में पंच मीना झरबड़े, शेरू उइके, फुलचंद्र उइके, सतीश गुजरे सहित ग्रामीण संतोष, महेश, रमेश राम सिंह, ज्ञान राव, कैलाश, सूरज, अजय, झामसु शामिल हैं। ग्रामीणों ने निष्पक्ष जांच कर चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता सुनिश्चित करने और अपात्र पाए जाने की स्थिति में नियुक्ति निरस्त करने की मांग की है।

 

 

 

 

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