संघ स्वावलंबी संगठन है राजनीतिक कृपा से नहीं चलता: भाग्गया जी:

पूरे विश्व को आज भारत के मार्गदर्शन की आवश्यकता: भाग्गया जी अटल सभागृह में आयोजित आरएसएस की प्रमुख जन गोष्ठी में विश्व गुरु बनने का आह्वान|

 

बैतूल। सामाजिक परिवर्तन का मूल मंत्र क्या है, राष्ट्र निर्माण का आधार क्या है और आने वाले 25 वर्षों में भारत की दिशा क्या होगी, इन सवालों के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रमुख जन गोष्ठी गुरुवार 19 फरवरी को जेएच कॉलेज के अटल सभा गृह में आयोजित की गई।

जन गोष्ठी में विचारों का मंथन हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता खेमराज जी डढोरे ने की। अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य भाग्गया जी ने अपने उद्बोधन में स्पष्ट कहा कि सामाजिक परिवर्तन किसी कानून या आंदोलन से नहीं, स्वयं के आचरण परिवर्तन से होगा। उन्होंने कहा कि पूरे विश्व को आज भारत के मार्गदर्शन की आवश्यकता है और अगले 25 वर्षों में भारत को विश्व गुरु बनना ही है, यह केवल सपना नहीं संकल्प है।

– संगठित समाज ही राष्ट्र की रक्षा

भाग्गया जी ने कहा कि देश की रक्षा संगठित समाज करेगा। संघ निष्ठ समाज, बस्ती संपर्क, पथ संचलन, हिंदू सम्मेलन, प्रमुख जन गोष्ठी, युवा कार्य और अधिक से अधिक स्थानों पर यात्राएं इसी उद्देश्य से की जाती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि संघ अहिंसावादी है, विरोधियों का विरोध नहीं करता, राजनीतिक कृपा से नहीं चलता और स्वावलंबी संगठन है। संघ में खेल है लेकिन वह स्पोर्ट क्लब नहीं, योग है लेकिन योगा क्लब नहीं, क्योंकि उसका लक्ष्य संपूर्ण हिंदू समाज को संगठित करना है।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्थापक डॉक्टर केशव बलिराम हेडगेवार के जीवन का उल्लेख करते हुए कहा गया कि वे जन्मजात देशभक्त थे। महारानी विक्टोरिया के सम्मान में बांटी गई मिठाई को उन्होंने फेंक दिया था और वंदे मातरम कहने पर उन्हें कक्षा से बाहर निकाल दिया गया था। वे बहु उपाधिधारी और प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण थे, अनुशीलन समिति के संयोजक रहे और सरदार वल्लभभाई पटेल तथा डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद जैसे नेताओं ने उनका सम्मान किया। वर्ष 1925 में उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की और सबको मिलकर कार्य करने तथा साथ विचार करने का संदेश दिया।

– प्रतिबंधों के बाद भी बढ़ता संगठन

भाग्गया जी ने कहा कि वर्ष 1948, 1975 और 1992 में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर प्रतिबंध लगाए गए, लेकिन संघ का कार्य नहीं रुका। संघ शाखा अभिनव पद्धति से चलती है। देश के एक लाख ग्रामों में विद्यार्थी शाखाओं का लक्ष्य लेकर कार्य हो रहा है। संघ में व्यक्ति पूजा नहीं, तत्व पूजा है और भगवा ध्वज को गुरु माना गया है। वर्ष 1936 में स्वयं सेविका समिति की स्थापना मौसी के संयोजन में हुई। पूर्वोत्तर राज्यों में सीमा जागरण, मानचित्र सेवा और सेवा भारती तथा रामकृष्ण मिशन के माध्यम से सेवा कार्य किए जाते रहे हैं। हिंदू समाज और संस्कृति का सम्मान आवश्यक है। बाबर से पूर्व 11 मुगल शासकों के आक्रमणों का उल्लेख करते हुए बताया गया कि गुरु नानक देव ने हिंदू शब्द में समग्र समाज का उल्लेख किया। संघ जाति-पाति से ऊपर एकात्मक संस्कृति की बात करता है। स्वदेशी सामग्री के प्रयोग, लव जिहाद पर चिंता, गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने और गौ हत्या बंद करने की मांग भी रखी गई। गौ आधारित कृषि, गोबर गैस प्लांट, जैविक कृषि और चिकित्सा पर चिंतन का आह्वान किया गया।

– पर्यावरण, परिवार और शिक्षा पर फोकस

भागया जी ने कहा कि समर्पित और ज्ञानवान शिक्षक बनना समय की आवश्यकता है। संस्कार केंद्र, चिकित्सा शिक्षा, उच्च शिक्षा संस्थानों में निशुल्क शिक्षा दिवस पर शासन को विचार करना चाहिए और राष्ट्रीय शिक्षा नीति से परिवर्तन संभव है। पर्यावरण संरक्षण के लिए जल संचय, नल का सीमित उपयोग, सिंगल यूज पॉलिथीन का त्याग, पेड़ लगाना और उनका संरक्षण आवश्यक है। कुटुंब, मातृभाषा, भजन, परिवार के इतिहास पर चर्चा और पंचमहाभूतों को नमन करना भारतीय जीवन शैली का हिस्सा है।

अंत में उन्होंने कहा कि अगले 15 से 20 वर्ष संघर्ष के काल रहेंगे। विदेशी फंडिंग से साहित्य का दुष्प्रचार किया जा रहा है, लेकिन भारत के सभी सक्रिय संगठन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। मातृभूमि की सेवा ही हमारा कर्तव्य है और संगठित हिंदू समाज ही भारत को फिर से विश्व गुरु बनाएगा।

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