हड़ताल का असर: 1600 आंगनबाड़ी केंद्र रहे बंद, 600 कर्मियों का कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन

न्यूनतम 32000 वेतन, 10000 पेंशन और सरकारी कर्मचारी का दर्जा मांग

बैतूल। जिले भर में गुरुवार 12 फरवरी को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिका एकता यूनियन मध्यप्रदेश (सीटू) के आह्वान पर आयोजित राष्ट्रव्यापी केंद्र बंद हड़ताल का व्यापक असर दिखा। करीब 600 आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं हड़ताल में शामिल रहीं तथा जिले के लगभग 1600 आंगनबाड़ी केंद्र बंद रहे। कर्मचारी भवन से निकली रैली शिवाजी चौक, पेट्रोल पंप, बस स्टैंड होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंची, जहां प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन डिप्टी कलेक्टर को सौंपा गया तथा महिला एवं बाल विकास अधिकारी गौतम अधिकारी को भी ज्ञापन दिया गया।

सीटू यूनियन के अध्यक्ष कामरेड कुंदन राजपाल ने हड़ताल को पूर्ण सफल बताते हुए कहा कि केंद्र सरकार द्वारा लागू चार श्रम संहिताओं और नियमों को निरस्त किया जाए, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को ग्रेड-3 एवं ग्रेड-4 सरकारी कर्मचारी का दर्जा दिया जाए तथा नियमितीकरण लंबित रहने तक न्यूनतम वेतन 32000 रुपये और 10000 रुपये मासिक पेंशन दी जाए।

रैली में अध्यक्ष सुनीता राजपाल, उपाध्यक्ष आशा सुरजे, योगिता शिवहरे, महासचिव पुष्पा वाईकर, कोषाध्यक्ष सुनीता तिवारी, संगीता कनाठे, काजल कुमरे, इंदिरा भारद्वाज, शबाना खान, गीता मालवी, स्नेहा डोंगरे, मीना जोठे, रुखसाना बानो, मुन्नी इवने, शकुन इवने, अर्चना टाले, रामकली धुर्वे, प्रमिला निरापुरे, अर्चना धोटे, सोनम मस्तराम, दयावती राजपूत शामिल रहीं। एमआर यूनियन से जिला अध्यक्ष राजेंद्र सिंह राठौर और दिवेश शुक्ला, सीटू यूनियन के संरक्षक डीके दत्ता, ऑटो यूनियन से मनोहर आठनकर, संजीव आठनकर, अमित तिवारी, राजेंद्र तरुण, जयसिंहपुरे, खगेंद्र सोनी, जय निरापुरे और कामरेड श्रवण चिकाने सहित सैकड़ों कार्यकर्ता मौजूद रहे।

– यह है प्रमुख मांगे

ज्ञापन में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार को संबोधित करते हुए टेक होम राशन वितरण में लागू दो चरणीय प्रमाणीकरण व्यवस्था, फेस रिकग्निशन सिस्टम और आधार लिंक मोबाइल पर ओटीपी अनिवार्यता को तत्काल रद्द करने की मांग की गई। 1 जनवरी 2025 से लागू प्रक्रिया के तहत हर वितरण में चेहरे का मिलान और ओटीपी आवश्यक किए जाने से हितग्राही वंचित हो रहे हैं, नेटवर्क और मोबाइल समस्याओं के कारण वितरण प्रभावित हो रहा है तथा असफलता पर मानदेय कटौती और नौकरी से हटाने की धमकी दी जा रही है।

ज्ञापन में खराब गुणवत्ता के मोबाइल, मात्र 2000 रुपये वार्षिक रिचार्ज, आदिवासी क्षेत्रों में नेटवर्क अभाव, सर्वर डाउन, पोषण ट्रेकर और संपर्क एप में दोहराव कार्य, ई-केवाईसी और फेस कैप्चर की जटिलता, निजी मोबाइल से काम का दबाव, 70 से 90 हितग्राहियों को एक दिन में वितरण की व्यावहारिक कठिनाई, ओटीपी को लेकर बैंक धोखाधड़ी का भय, परिवहन व्यय का भुगतान न होना, भवन किराया वृद्धि, पानी-लाइट-पंखे की व्यवस्था, ग्रेच्युटी भुगतान, 5 लाख मृत्यु सहायता, सेवा निवृत्ति लाभ तत्काल भुगतान, बीएलओ ड्यूटी से मुक्ति, 3 से 6 वर्ष के बच्चों के सरकारी स्कूलों में प्रवेश आदेश निरस्त कर आंगनबाड़ी में ही केजी-1 और केजी-2 संचालित करने, सेवा निवृत्ति आयु 65 वर्ष करने, पर्यवेक्षक पदों पर 100 प्रतिशत पदोन्नति, टीए-डीए भुगतान, एक माह ग्रीष्मकालीन अवकाश, वार्षिक अवकाश कैलेंडर तथा मानदेय को किसी भी एप से न जोड़ने की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई। यूनियन ने स्पष्ट कहा कि बुनियादी ढांचे के बिना डिजिटलीकरण और एफआरएस थोपना हितग्राहियों के अधिकारों और आंगनबाड़ी कर्मियों के सम्मान दोनों पर आघात है।

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