कंगला मांझी सरकार सामान्य नाम नहीं आजादी की लड़ाई का इतिहास है: कुंभदेव कांगे

सैनिक सम्मेलन में अवैध कब्जे, धर्मांतरण और घुसपैठ पर निर्णायक कार्रवाई की मांग

चोपना क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ भूमि पर कब्जा करने का आरोप

बैतूल। शाहपुर ब्लॉक के ग्राम मालवर में आयोजित तीन दिवसीय सैनिक सम्मेलन में देश की सुरक्षा, आदिवासी समाज की पहचान और जमीन पर बढ़ते अवैध कब्जों को लेकर कंगला मांझी सरकार ने सीधे तौर पर सरकार और प्रशासन से जवाब मांगा।

इस तीन दिवसीय सैनिक सम्मेलन में संस्था की राष्ट्रीय अध्यक्ष राजमाता श्रीमती फुलवा देवी कांगे और राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कुंभदेव कांगे की मौजूदगी ने आयोजन को राष्ट्रीय महत्व दे दिया। दिल्ली से आए प्रतिनिधि मंडल के साथ विशेष अतिथि जनपद पंचायत घोड़ाडोंगरी के अध्यक्ष राहुल उइके और ग्राम पंचायत खापा की सरपंच सहनवती कवडे भी मंच पर मौजूद रहीं। बड़ी संख्या में क्षेत्रीय जनता और जिले भर से पहुंचे मांझी सरकार सैनिक सम्मेलन के साक्षी बने।

मुख्य अतिथि राजमाता श्रीमती फुलवा देवी कांगे ने बिना लाग-लपेट कहा कि संगठन का मूल उद्देश्य केवल एक संस्था चलाना नहीं, देश और समाज की रक्षा करना है। उन्होंने कहा कि हर समाज, हर वर्ग को अपनी परंपराएं, रीति-रिवाज, संस्कृति और सभ्यता को जीवित रखना होगा। विदेशी आक्रमणकारियों की मानसिकता आज भी अलग-अलग रूपों में भारत की संस्कृति को कमजोर करने की कोशिश कर रही है, धर्मांतरण हो रहा है, दबाव बनाया जा रहा है, लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद भारत विश्व में तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस प्रगति की ताकत एकता और अखंडता है, जिसे कमजोर नहीं होने दिया जाएगा।

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष कुंभदेव कांगे ने सैनिकों को याद दिलाया कि कंगला मांझी सरकार कोई सामान्य नाम नहीं, आजादी की लड़ाई का इतिहास है। उन्होंने कहा कि संस्थापक क्रांतिवीर कंगला मांझी ने अपने सैनिकों के साथ अंग्रेजी हुकूमत को घुटने टेकने पर मजबूर किया था। उन्होंने कई लड़ाइयां लड़ीं और देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए आज भी देश की रक्षा करना हर सैनिक और हर नागरिक का दायित्व है।

– आदिवासी समाज की संस्कृति को भारत की पहचान

विशेष अतिथि राहुल उइके ने आदिवासी समाज की संस्कृति को भारत की पहचान बताते हुए कहा कि यह संस्कृति विश्व स्तर पर सम्मान पाती है। उन्होंने क्षेत्र की विभिन्न जन समस्याओं को लेकर भारत सरकार के नाम ज्ञापन राजमाता श्रीमती फुलवा देवी कांगे को सौंपा।

ग्राम पंचायत खापा की सरपंच सहनवती कवडे ने गंभीर मुद्दा उठाते हुए कहा कि क्षेत्र में गरीब आदिवासी परिवारों की बेटियों को बहला-फुसलाकर शोषण किया जा रहा है, आरक्षण का दुरुपयोग हो रहा है और आदिवासी जमीनों पर कब्जे किए जा रहे हैं। इसे रोकने के लिए ठोस कार्रवाई की मांग की गई।

– अवैध कब्जे और घुसपैठ का आरोप

जिले के प्रभारी जिला अध्यक्ष रामकिशोर धुर्वे के नेतृत्व में सौंपे गए ज्ञापन में बताया गया कि वर्ष 1962 में भारत सरकार द्वारा विदेशी नागरिकों को शरण दी गई थी, लेकिन सूचना के अधिकार अधिनियम के तहत प्राप्त जानकारी के अनुसार सैकड़ों लोग चोपना क्षेत्र में अवैध रूप से बस गए और सैकड़ों एकड़ भूमि पर कब्जा कर लिया। प्रशासन मूल निवासियों पर कार्रवाई करता है, लेकिन बाहरी कब्जाधारियों पर चुप्पी साध लेता है। मांग की गई कि भारत सरकार एसआईआर के माध्यम से पहचान कर कानूनी कार्रवाई करे।

– रेता चोरी का आरोप

चोपना-मालवर क्षेत्र में रेता की अवैध चोरी का मुद्दा भी सम्मेलन में गूंजा। वक्ताओं ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों की लूट आदिवासी क्षेत्रों को और कमजोर कर रही है।

प्रभारी जिला अध्यक्ष रामकिशोर धुर्वे ने बताया कि राजमाता श्रीमती फुलवा देवी कांगे का तीन दिवसीय दौरा सफल रहा, कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हुआ। समापन के बाद बड़ी संख्या में मांझी सरकार सैनिक घोड़ाडोंगरी रेलवे स्टेशन पहुंचे और छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस में सेल्यूट सलामी के साथ राजमाता को विदाई दी।

कार्यक्रम में मध्यप्रदेश के संरक्षक एनआर ठाकुर, मध्यप्रदेश प्रांत अध्यक्ष दिनेश धुर्वे, प्रांत कोषाध्यक्ष रामप्रसाद इवने, प्रांत उप कोषाध्यक्ष श्रवण कुमार परते सहित कई पदाधिकारी मौजूद रहे।

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