माइक्रोबायोलॉजी की राष्ट्रीय संगोष्ठी में 250 विद्यार्थियों ने सीखी आधुनिक तकनीकें
डीएनए एक्सट्रैक्शन, पीसीआर, इलेक्ट्रोफोरेसिस जैसी मॉलिक्यूलर तकनीकों का दिया व्यावहारिक प्रशिक्षण


वैदिक माइक्रोबायोलॉजी और मॉडर्न साइंस पर राष्ट्रीय विमर्श, शोधार्थियों ने पेश किए नवाचार
माइक्रोस्कोप से मॉलिक्यूलर टेक्नीक तक, राष्ट्रीय संगोष्ठी में बैतूल बना शोध का केंद्र
बैतूल। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैतूल में बुधवार 4 फरवरी को माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी में शोध, नवाचार और वैदिक दृष्टिकोण पर सार्थक मंथन हुआ। मध्यप्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग भोपाल के निर्देशानुसार आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर से आए विषय विशेषज्ञों और शोधार्थियों ने भाग लिया। संगोष्ठी में डीएनए एक्सट्रैक्शन, पीसीआर, इलेक्ट्रोफोरेसिस जैसी मॉलिक्यूलर तकनीकों का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। 250 से अधिक विद्यार्थियों की सक्रिय सहभागिता ने कार्यक्रम को अकादमिक दृष्टि से अत्यंत सफल और सार्थक बना दिया।
यह संगोष्ठी प्राचार्य डॉ. मीनाक्षी चौबे की संगठन व्यवस्था में, विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अर्चना सोनारे के मार्गदर्शन तथा समन्वयक डॉ. महेन्द्र नावंगे के नेतृत्व में आयोजित की गई। राष्ट्रीय संगोष्ठी का द्वितीय सत्र जूलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. बी. डी. नागले की अध्यक्षता में संपन्न हुआ।
– अध्यक्षीय उद्बोधन में मिला शोध के लिए प्रेरणास्रोत
अध्यक्षीय उद्बोधन में डॉ. बी. डी. नागले ने विद्यार्थियों को सूक्ष्मजीवों, माइक्रोबायोलॉजी विषय और माइक्रोस्कोप जैसे उपकरणों के गहन अध्ययन के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान में सूक्ष्मजीवों का अध्ययन मानव जीवन, स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। सत्र के दौरान विद्यार्थियों द्वारा पोस्टर प्रेजेंटेशन प्रस्तुत किए गए तथा वैदिक माइक्रोबायोलॉजी थीम पर मौखिक प्रेजेंटेशन भी हुए।
– देशभर से आए शोधार्थियों ने प्रस्तुत किए शोध पत्र
जबलपुर से पधारे शोधार्थियों में सुश्री सृष्टि सैम्युल ने किरटिनोफिलिक फंजाई पर अपना शोध पत्र प्रस्तुत किया। असिस्टेंट प्रोफेसर वंशिका ठाकुर ने वेजाइनल फंगल इंफेक्शन विषय पर शोध पत्र पढ़ा। बैतूल क्षेत्र से आई रिसर्च स्कॉलर माया सूर्यवंशी ने अस्पताल के आसपास के वातावरण में पाए जाने वाले माइक्रोफ्लोरा पर अपने शोध निष्कर्ष प्रस्तुत किए। प्रेजेंटेशन के दौरान विषय विशेषज्ञों ने शोधार्थियों से प्रश्न पूछे, जिनका विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ उत्तर दिया।
– वैदिक माइक्रोबायोलॉजी और पेटेंट कानून पर विशेष व्याख्यान
इसी क्रम में बैतूल के शासकीय लॉ कॉलेज के प्राचार्य डॉ. हर्षवर्धन यादव ने वैदिक माइक्रोबायोलॉजी और मॉडर्न पेटेंट लॉ विषय पर अत्यंत महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकार के अंतर्गत पेटेंट अधिनियम 1970 के नियमों की जानकारी देते हुए विद्यार्थियों को अपने आविष्कारों और शोध को संरक्षित रखने के तरीके बताए। होम साइंस कॉलेज जबलपुर की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रुचिका यदु ने फंगल इंफेक्शन पर विस्तृत व्याख्यान देते हुए विभिन्न संवर्धन माध्यमों और फंगस की स्पीशीज की पहचान की विधियां समझाईं।
– मॉलिक्यूलर टेक्नीक कार्यशाला में डीएनए से लेकर पीसीआर तक प्रशिक्षण
सीहोर से आए असिस्टेंट प्रोफेसर जूलॉजी डॉ. नितिन बाटन ने विद्यार्थियों को मॉलिक्यूलर टेक्नीक पर आधारित प्रयोग कराए। कार्यशाला में डीएनए एक्सट्रक्शन, पीसीआर एवं इलेक्ट्रोफोरेसिस की विधियों को विस्तार से समझाया गया। इस कार्यशाला में लगभग 250 विद्यार्थियों ने सहभागिता कर व्यावहारिक ज्ञान प्राप्त किया। गवर्नमेंट कॉलेज पानगर जबलपुर की सहायक प्राध्यापक बॉटनी डॉ. ऋचा गुमाश्ता ने सही फंगस स्पीशीज की पहचान, उपचार तथा बायोइन्फॉर्मेटिक्स क्षेत्र में शोध की संभावनाओं पर प्रकाश डाला।
– समापन सत्र में विजेताओं को किया सम्मानित
समापन सत्र में विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार एवं प्रमाण पत्र प्राचार्य डॉ. मीनाक्षी चौबे, डॉ. बी. डी. नागले, डॉ. अलका पांडे, डॉ. नवीन वर्मा, प्रोफेसर निखिल कानूगो, डॉ. हर्षवर्धन यादव एवं प्रोफेसर अर्चना सोनारे द्वारा वितरित किए गए। पोस्टर प्रेजेंटेशन में नम्रता वर्मा को तृतीय, निकिता सराठे को द्वितीय एवं आकाश इवने को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। मौखिक प्रेजेंटेशन में सांत्वना पुरस्कार शोभा सोलंकी एवं शीतल यादव को मिला, तृतीय पुरस्कार सारिका देशपांडे एवं प्रांजल वर्मा को संयुक्त रूप से दिया गया, द्वितीय स्थान वंशिका ठाकुर एवं माया सूर्यवंशी को संयुक्त रूप से प्राप्त हुआ, जबकि प्रथम स्थान सृष्टि सैम्युल ने हासिल किया। फैकल्टी उद्बोधन में डॉ. हर्षवर्धन यादव प्रथम रहे।
– शिक्षक-छात्रों की सक्रिय सहभागिता से कार्यक्रम रहा सफल
कार्यक्रम का संचालन डॉ. निहारिका भावसार एवं प्रोफेसर दीपिका साहू द्वारा किया गया। कार्यक्रम में रसायन विभागाध्यक्ष डॉ. ओ. पी. खत्री, भौतिक शास्त्र विभागाध्यक्ष डॉ. सुभाष खातरकर, डॉ. जी. पी. साहू, डॉ. एकनाथ निरापुरे, डॉ. मनोज बोरसे, डॉ. युगल किशोर सरले, डॉ. रितु साहू, डॉ. सुनिता गढ़ेकर, डॉ. राहुल सिंह ठाकुर, डॉ. पंकज बारस्कर, प्रोफेसर संतोष पवार, डॉ. राजकुमार चौकीकर सहित अनेक प्राध्यापक उपस्थित रहे। विद्यार्थियों में शारदा बनकर, महक शेख, शीतल पवार, शोभा सोलंकी, आदित्य पाल, हर्षिता, मयूर वराठे, पवन एवं सतीश वाडिवा ने सक्रिय भागीदारी निभाई। कार्यक्रम के अंत में प्रोफेसर अर्चना सोनारे ने आभार व्यक्त किया।





