प्राचीनकाल में ऋषि शुश्रुत ने जटिल सर्जरी कर स्थापित की भारतीय चिकित्सा ज्ञान की महान परंपरा : प्राचार्य डॉ. मीनाक्षी चौबे
जेएच कालेज में फंगस, संक्रमण और उपचार पर केंद्रित राष्ट्रीय संगोष्ठी में विशेषज्ञों ने दिया मार्गदर्शन

माइक्रोबायोलॉजी पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी से विद्यार्थियों को मिला शोध का नया दृष्टिकोण
शोध, प्रशिक्षण और प्रस्तुति के अवसरों के साथ सम्पन्न हुई दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी
बैतूल। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस ज. हा. शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय बैतूल में माइक्रोबायोलॉजी विभाग द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसने महाविद्यालय को राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक संवाद का केंद्र बना दिया। मध्यप्रदेश शासन उच्च शिक्षा विभाग भोपाल के आदेशानुसार आयोजित इस संगोष्ठी का संचालन प्राचार्य डॉ. मीनाक्षी चौबे की संगठन व्यवस्था में तथा विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अर्चना सोनारे के मार्गदर्शन में किया गया। संगोष्ठी के समन्वयक डॉ. महेन्द्र नावंगे रहे, जिनके नेतृत्व में दोनों दिवसों का कार्यक्रम सुव्यवस्थित रूप से संपन्न हुआ।
– प्राचीन भारतीय ज्ञान से आधुनिक शोध की ओर बढ़ने का आह्वान
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए प्राचार्य डॉ. मीनाक्षी चौबे ने कहा कि प्राचीनकाल में ऋषि शुश्रुत द्वारा सर्जरी जैसे जटिल कार्य किए गए, जो भारतीय चिकित्सा ज्ञान की महान परंपरा को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपने प्राचीन ज्ञान का संरक्षण और संवर्धन करना चाहिए तथा उसी मजबूत आधार पर आधुनिक शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहिए, ताकि भारत की वैज्ञानिक विरासत को नई ऊंचाइयों तक ले जाया जा सके।
– श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को मिलेगा सम्मान
जनभागीदारी समिति अध्यक्ष घनश्याम मदान ने अपने संबोधन में कहा कि इस दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी में जो छात्र या छात्रा अपनी कुशलता, विषय समझ और प्रस्तुति के आधार पर श्रेष्ठतम प्रदर्शन करेगा, उसे जनभागीदारी समिति द्वारा सम्मानित किया जाएगा। उन्होंने विद्यार्थियों को इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाने और स्वयं को राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने के लिए प्रेरित किया।
– विशेषज्ञों ने माइक्रोबायोलॉजी के विविध आयामों पर डाला प्रकाश
मुख्य अतिथि डॉ. पंकज कोठारी ने प्राचीन समय में होने वाली सर्जरी के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए माइक्रोबायोलॉजी विषय की उपयोगिता और महत्व पर विस्तार से जानकारी दी। डॉ. शेषराव नावंगे ने मेडिकल माइकोलॉजी विषय पर व्याख्यान देते हुए विभिन्न उपकरणों की जानकारी दी तथा विद्यार्थियों को फंगस से होने वाले संक्रमण, उनके स्रोत, पीड़ित व्यक्ति से सैंपल लेने की विधि और पहचान के तरीकों के बारे में विस्तार से बताया। इसी क्रम में डॉ. अल्का पाण्डेय ने फंगस के कारण होने वाले विभिन्न रोगों पर प्रकाश डालते हुए छात्रों से अपील की कि वे इन विषयों का गहन अध्ययन करें और उच्च स्तर पर अपने शोध पत्र प्रस्तुत करें।
– प्रयोगात्मक प्रशिक्षण से विद्यार्थियों को मिला प्रत्यक्ष अनुभव
प्रथम दिवस के समापन सत्र में जितेन्द्र नावंगे द्वारा विद्यार्थियों को फंगस कल्चर, आइडेंटिफिकेशन और ड्रग सेंसिटिविटी से संबंधित व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस प्रशिक्षण सत्र ने विद्यार्थियों को प्रयोगशाला स्तर पर विषय की गहराई से समझ विकसित करने का अवसर दिया, जिससे संगोष्ठी का शैक्षणिक उद्देश्य पूर्ण हुआ।




