न्यायालय के आदेश को नजरअंदाज कर रही मुलताई नगर पालिका, डेढ़ वर्ष से नहीं हो सका अध्यक्ष का चुनाव
हारी हुई प्रत्याशी को बनाया मनोनीत अध्यक्ष, लोकतंत्र की अनदेखी के आरोप

मुलताई नगर पालिका में नहीं हुआ चुनाव, जनप्रतिनिधियों में आक्रोश
बैतूल। न्यायपालिका के आदेश के बावजूद नगर पालिका मुलताई में अध्यक्ष पद का चुनाव नहीं होना अब एक गंभीर जनहित का मुद्दा बनता जा रहा है। महावीर वार्ड क्रमांक 7 की पार्षद श्रीमती वंदना नितेश कुमार साहू ने कलेक्टर जनसुनवाई में शिकायत दर्ज कर मांग की है कि प्रथम अपर जिला न्यायाधीश मुलताई द्वारा दिनांक 13 जून 2023 को पारित आदेश का पालन करते हुए नगर पालिका अध्यक्ष पद के लिए चुनाव की प्रक्रिया एक माह के भीतर संपन्न कराई जाए।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, 8 अगस्त 2022 को नगर पालिका के सभागार में अध्यक्ष पद के लिए चुनाव हुआ था, जिसे न्यायालय ने अवैध और शून्य घोषित किया। न्यायालय ने जिला निर्वाचन अधिकारी (कलेक्टर) को आदेशित किया था कि एक माह के भीतर विधिसम्मत प्रक्रिया से चुनाव कराए जाएं। हालांकि इस आदेश के विरुद्ध वंदना साहू द्वारा उच्च न्यायालय जबलपुर में याचिका प्रस्तुत की गई थी, जिस पर 4 अक्टूबर 2023 को स्थगन आदेश पारित हुआ, लेकिन यह याचिका 5 अगस्त 2025 को वापस ले ली गई। इसके बाद अब कोई कानूनी अड़चन शेष नहीं रही है।
शिकायत में उल्लेख किया गया है कि मनोनीत अध्यक्ष लगभग डेढ़ वर्ष से नगर पालिका का कार्यभार संभाल रही हैं, जबकि यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें यह जिम्मेदारी किस आदेश या अधिकार के तहत दी गई। न तो जनता को इस विषय की जानकारी है और न ही अन्य निर्वाचित पार्षदों को। मुलताई नगर पालिका परिषद में कुल 8 महिला पार्षद हैं, ऐसे में यह भी सवाल उठता है कि हारी हुई प्रत्याशी को मनोनीत अध्यक्ष के रूप में नियुक्त करना लोकतंत्र की भावना के विरुद्ध क्यों नहीं माना जाए?
वंदना साहू ने अपनी शिकायत में यह भी स्पष्ट किया है कि वर्तमान मनोनीत अध्यक्ष स्वयं न्यायालय में याचिकाकर्ता हैं और उन्होंने स्वयं अदालत में यह आग्रह किया है कि 13 जून 2023 का आदेश सही है तथा चुनाव होना चाहिए। ऐसे में जब मनोनीत अध्यक्ष भी न्यायालय के आदेश के पक्ष में हैं, तो चुनाव में अनावश्यक विलंब लोकतंत्र की अवमानना ही कहा जाएगा।
– नगर पालिका की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता और निष्पक्षता का अभाव
नगर पालिका की कार्यप्रणाली में पिछले कई महीनों से पारदर्शिता और निष्पक्षता का अभाव स्पष्ट रूप से देखने को मिल रहा है। पार्षदों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा कर नगर पालिका की प्रशासनिक व्यवस्था एकतरफा चलाई जा रही है।
शिकायत में यह भी मांग की गई है कि जब तक चुनाव की प्रक्रिया संपन्न नहीं हो जाती, तब तक नगर पालिका में एक सक्षम शासकीय प्रशासक की नियुक्ति की जाए ताकि आम जनता के कार्य प्रभावित न हों और निष्पक्षता बनी रहे।
जनता ने 15 वार्डों में पार्षदों का चुनाव पूरी पारदर्शिता से किया था, इस विश्वास के साथ कि लोकतांत्रिक ढंग से चुना गया नेतृत्व नगर के विकास में सक्रिय भूमिका निभाएगा। लेकिन पिछले 18 महीनों से अध्यक्ष का चुनाव न होना और प्रशासन द्वारा मनोनीत व्यवस्था को जारी रखना इस विश्वास को तोड़ रहा है।





