Poetry conference held on Vyas Purnima in Betul Bazaar: साहित्य परिषद के आयोजन में छलका भारतीय संस्कृति का भाव, आत्मबोध से विश्वबोध तक पहुंचे विचार
बैतूलबाजार में व्यास पूर्णिमा पर हुआ काव्य-सम्मेलन, गुरुजनों को किया सम्मानित

बैतूल। साहित्य जब समाज का दर्पण बनता है और गुरुजनों का सम्मान जब परंपरा बन जाता है, तब ऐसी गोष्ठियां इतिहास की दिशा तय करती हैं। बैतूल बाजार की प्राचीन सांस्कृतिक भूमि पर ऐसा ही एक दृश्य साकार हुआ, जब काव्य, चिंतन और संवाद के साथ साहित्य की ज्योति प्रज्वलित हुई।
बैतूल बाजार स्थित डिवाइन हायर सेकंडरी स्कूल में अखिल भारतीय साहित्य परिषद, जिला बैतूल इकाई द्वारा व्यास पूर्णिमा के पावन पर्व पर एक प्रेरणादायी साहित्यिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों की पुनर्स्थापना, गुरु परंपरा का स्मरण एवं साहित्य के माध्यम से सामाजिक चेतना का विस्तार करना रहा।
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में मध्य भारत प्रांतीय समिति के उपाध्यक्ष सुनील पांसे, मीडिया प्रभारी नवल वर्मा, प्रांतीय सदस्य अजय पंवार मंचासीन रहे। संचालन जिला महामंत्री धर्मेंद्र कुमार खवसे ने किया। शुभारंभ माँ सरस्वती और महर्षि वेदव्यास के चित्र पर माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से हुआ। परिषद गीत की प्रस्तुति नवल वर्मा ने की, वहीं सरस्वती वंदना वरिष्ठ साहित्यकार सुभाष जामगड़े ने प्रस्तुत की।
– गुरुजनों को दिया विशेष सम्मान
इस आयोजन में नगर के वयोवृद्ध सेवानिवृत्त शिक्षकों का तिलक लगाकर एवं पौधारोपण सामग्री भेंट कर सम्मान किया गया। यह सम्मान भारतीय गुरु-शिष्य परंपरा की जीवंत प्रस्तुति रहा। रामायण मंडल के कलाकारों सहित विभिन्न सांस्कृतिक मंचों पर योगदान देने वाली स्थानीय प्रतिभाओं का भी अभिनंदन किया गया।
– आत्मबोध से विश्वबोध की ओर
प्रथम सत्र में सुनील पांसे ने आत्मबोध से विश्वबोध विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारत को 2047 तक विश्वगुरु बनाने की दिशा में साहित्यकारों की भूमिका अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने वामपंथी सोच से मुक्ति पाकर भारतीय जीवनमूल्यों की पुनर्स्थापना की बात कही। प्रांतीय सदस्य अजय पंवार ने वेदव्यास के योगदान पर प्रकाश डालते हुए गुरुदेव श्रीराम शर्मा आचार्य के विचारों को आत्मसात करने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम के द्वितीय सत्र में जिलेभर से आए साहित्यकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से समाज, संस्कृति और राष्ट्र के विभिन्न पहलुओं को प्रस्तुत किया। ओज, भाव और चेतना से भरी इन कविताओं ने श्रोताओं को भीतर तक प्रभावित किया।
– आगामी योजनाओं पर हुई चर्चा
बैठक में ग्वालियर में सम्पन्न प्रांतीय अधिवेशन की रिपोर्ट प्रस्तुत की गई तथा आगामी आयोजनों की रूपरेखा पर विस्तार से विचार-विमर्श हुआ। सभी साहित्यकारों ने एकजुट होकर समाज निर्माण में साहित्य को माध्यम बनाकर कार्य करने का संकल्प लिया। कार्यक्रम का समापन जिला मीडिया प्रभारी प्रसेन मालवी द्वारा आभार प्रदर्शन से हुआ। उन्होंने सभी अतिथियों, साहित्यकारों, सहयोगियों और आयोजकों के प्रति आभार प्रकट किया।इस अवसर पर सुभाष जामगड़े, महेंद्र गुदवारे, संतोष राठौर, ब्रजेन्द्र रडवे, गुड्डा वर्मा पत्रकार, निरंजन सोनारे, सुनील पांसे, नवल वर्मा पत्रकार, प्रसेन मालवी, सुनील लोनारे, विजय पानकर, नरेंद्र विजयकर, मुकेश बाबूजी, परस्या लोनारे, गोलू सेम्भेकर, विवेक राठौर, अनूप वर्मा, भूपेन्द्र राठौर, पीयूष वर्मा, मनोज धाड़से, नारायण साहू, अजय पंवार, धर्मेंद्र खवसे सहित अनेक साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे।





