The body is the biggest deceiver in life: जीवन में सबसे बड़ा धोखेबाज है शरीर: अतुल कृष्ण शास्त्री

भागवत कथा के चतुर्थ दिन श्री कृष्ण की दिव्य लीलाओं का हुआ वर्णन

 

बैतूल। केसर बाग में आयोजित भागवत कथा के चतुर्थ दिन श्री धाम वृंदावन से पधारे कथा व्यास अतुल कृष्ण शास्त्री ने जीवन के महत्वपूर्ण पहलुओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि जीवन में सबसे बड़ा धोखेबाज शरीर है, जिस पर मनुष्य सबसे अधिक प्रेम करता है। शरीर की निरंतर अनुकूलता और प्रतिकूलता पर ध्यान रखने के बावजूद, एक समय ऐसा आता है जब यह शरीर हमसे बिना बताए छूट जाता है।

श्री शास्त्री ने कहा कि हमें यह सोचने की आवश्यकता है कि हमारा शरीर केवल एक निर्धारित समय तक ही हमारे पास है। राजा परीक्षित का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि प्रभु ने हमें आठवें दिन का समय नहीं दिया, इसलिए हमें यह समझना चाहिए कि हर दिन कीमती है। उन्होंने बताया कि जो व्यक्ति अपने अंत और भगवंत को याद रखता है, उसका कभी पतन नहीं हो सकता। महापुरुषों ने हमेशा नाम जपने और सत्संग करने का उपदेश दिया है, क्योंकि यही कल्याण का रास्ता है।

कथा के दौरान श्री शास्त्री ने यह भी बताया कि श्री कृष्ण का जन्म कंस के अत्याचारों से परेशान सम्पूर्ण प्रकृति की रक्षा के लिए हुआ। देवकी और वसुदेव के घर भगवान श्री कृष्ण ने मथुरा की कारागार में जन्म लिया और बाद में उन्हें गोकुल में श्री नंद भवन में विराजित किया। श्री कृष्ण के जन्म के बाद समस्त ब्रजवासियों और देवताओं ने खुशी से उनका अभिनंदन किया। इस विशेष अवसर पर सलूजा परिवार के सदस्य और भक्तगण श्री कृष्ण की लीलाओं से आनंदित हुए।

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