Bhagwat: श्री कृष्ण-कुन्ती संवाद और परीक्षित जन्म की कथा सुन श्रद्धालु हुए भाव-विभोर
सलूजा परिवार द्वारा केसर बाग में श्रीमद् भागवत कथा का आयोजन

Bhagwat: बैतूल। जीव सदा से ही भगवान का अंश है, लेकिन संसार की आसक्ति उसे भगवत संबंध से दूर कर देती है। तन-मन-प्राण समर्पण कर श्री हरि के चरणों का आश्रय लेने से ही जीव भयावह कर्मजाल से मुक्त हो सकता है। संतों और सत्संग का आश्रय पाकर जीव अपने निज स्वरूप में स्थित हो सकता है और भगवत प्राप्ति के परम लक्ष्य को सहज ही प्राप्त कर सकता है।
उक्त उद्गार श्रीधाम वृंदावन से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक हित शरण पं.अतुल कृष्ण शास्त्री ने केसर बाग में आयोजित भागवत कथा के दूसरे दिन 17 दिसंबर को श्री कृष्ण-कुन्ती संवाद, श्री भीष्म स्तुति और राजा परीक्षित जन्म की कथा में व्यक्त किए। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा स्थल पर पहुंचे और अमृतमयी वाणी का रसपान किया। उल्लेखनीय है कि सलूजा परिवार के तत्वाधान में श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ 16 दिसंबर को केसर बाग में हुआ।

कथा में पं. शास्त्री ने बताया कि जीवन के अंतिम क्षणों में श्री भीष्म पितामह ने अपनी प्राण गति को रोककर भगवान श्री कृष्ण के दर्शन की प्रतीक्षा की। उनके इस समर्पण और श्रद्धा को देखकर स्वयं भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें दर्शन देकर उनकी जीवन और मृत्यु यात्रा को मंगलमय बना दिया और चरणों में स्थान दिया।
राजा परीक्षित का सात दिन में किया कल्याण
पंडित अतुल कृष्ण शास्त्री जी ने कथा के माध्यम से पांडव कुल के कर्मयोगी सम्राट राजा परीक्षित की कथा भी सुनाई। उन्होंने बताया कि राजा परीक्षित ने अपने जीवन के अंतिम सात दिनों में परम हंस सद्गुरु श्री शुकदेव जी के चरणों में बैठकर श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण किया और मोक्ष को प्राप्त किया। कथा स्थल पर श्रद्धालुओं ने श्रीमद् भागवत कथा के दिव्य प्रसंगों का आनंद लिया। कथा के दौरान माहौल भक्ति और आस्था से सराबोर हो गया। श्री अतुल कृष्ण शास्त्री जी के प्रवचनों ने श्रद्धालुओं को भाव-विभोर कर दिया और सभी ने श्री हरि के चरणों में अपना समर्पण भाव व्यक्त किया।




